आंध्र प्रदेश के जलाशयों में भारी बारिश के बाद 505.76 TMC जल संग्रह
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विजयवाड़ा में हालिया साइक्लोन‑मुरासु और अर्नब से उत्पन्न भारी वर्षा ने आंध्र प्रदेश के जलाशयों में जल उपलब्धता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा दिया है। राज्य के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 6 नवंबर तक सक्रिय भंडारण 505.76 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) तक पहुंच गया, जबकि कुल पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) क्षमता 1,161.36 TMC है, जिससे 655.59 TMC का बाढ़ कुशन शेष रहता है।
विस्तृत आंकड़े दर्शाते हैं कि तटीय आंध्र में जलाशयों ने 682.05 TMC की कुल क्षमता में से 343.18 TMC का भंडारण किया है, जबकि रेयालसेमा क्षेत्र में 373.52 TMC की क्षमता में से 125.47 TMC जल संग्रहीत है। यह अंतर मुख्यतः तटीय जिलों में अधिक वर्षा के कारण है, जहाँ जलाशयों ने अधिक जल धारण किया है।
मुख्य नदियों के बांधों पर भी प्रवाह में वृद्धि दर्ज की गई। गोदावरी पर सर आर्थर कॉटन बैरिज पर लगभग 79,911 क्यूसेक का प्रवाह रहा, जबकि कृष्णा पर प्रकाशम बैरिज पर 39,875 क्यूसेक का प्रवाह दर्ज हुआ। पुलिचिंथला प्रोजेक्ट में प्रवेश प्रवाह 8,583 क्यूसेक और निकास प्रवाह मात्र 400 क्यूसेक रहा, जिससे बड़ी मात्रा में जल धारण किया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस बढ़ी हुई जल भंडारण से आगामी कृषि मौसम के लिए जल संरक्षण का अवसर मिलता है। साथ ही, पर्याप्त बाढ़ कुशन उपलब्ध होने से आगे की वर्षा के प्रवाह को नियंत्रित करने और नीचे के क्षेत्रों में अचानक जल निकासी से उत्पन्न बाढ़ जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।
समग्र रूप से, भारी वर्षा ने आंध्र प्रदेश के जल संसाधन प्रबंधन में सकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे जलसंकट की संभावनाओं में कमी और कृषि उत्पादन के लिए जल उपलब्धता में सुधार की आशा उत्पन्न होती है।
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