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विज्ञान

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने स्टार्टअप इंडिया‑I‑STEM एपीआई एकीकरण शुरू किया

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

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भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) कार्यालय ने 6 नवंबर 2026 को स्टार्टअप इंडिया पोर्टल और इंडियन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग फैसिलिटीज (I‑STEM) पोर्टल के बीच एपीआई एकीकरण की शुरुआत की। यह पहल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIT) के सहयोग से की गई और पीएसए प्रो. अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

लॉन्च कार्यक्रम में पीएसए कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी, DPIT के अपर सचिव अतीश कुमार सिंह, वैज्ञानिक‑F डॉ. विशाल चौधरी, वैज्ञानिक‑D डॉ. संतोष नायर, तकनीकी स्टाफ डॉ. शेफाली उत्तम तथा दोनों विभागों की टीम के कई सदस्य उपस्थित रहे। डॉ. विशाल चौधरी ने I‑STEM की वर्तमान स्थिति और संभावित प्रभाव पर संक्षिप्त प्रस्तुति दी, जिससे उपस्थित सभी को एकीकरण के तकनीकी पहलुओं की स्पष्ट समझ मिली।

प्रो. सूद ने बताया कि यह एपीआई एकीकरण केवल डिजिटल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्टार्टअप इकोसिस्टम को राष्ट्रीय अनुसंधान बुनियादी ढांचे से जोड़ने वाला संस्थागत तालमेल है। इससे डीपीआईआईटी‑मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं, परीक्षण सुविधाओं और प्रोटोटाइपिंग केंद्रों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी, जिससे आर एंड डी लागत में कमी, दोहराव से बचाव और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने विशेष रूप से डीप‑टेक स्टार्टअप्स की प्रौद्योगिकी विकास, परीक्षण और वैलिडेशन सुविधाओं तक पहुँच की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. मैनी ने I‑STEM की भूमिका को शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच बुनियादी ढांचे के साझा उपयोग को बढ़ावा देने के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एकीकरण के बाद DPIT‑मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को आवश्यक सुविधाओं की खोज सरल हो जाएगी, जिससे नवाचार प्रक्रिया तेज़ होगी। अतीश कुमार सिंह ने इस एकीकरण को डीप‑टेक क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के DPIT के प्रयासों को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि स्टार्टअप्स अब महंगे उपकरणों में अलग से निवेश करने की आवश्यकता कम महसूस करेंगे और वे संस्थानों की क्षमताओं का लाभ उठाकर उत्पाद विकास और सत्यापन को तेज़ कर सकेंगे।

समग्र रूप से यह एपीआई एकीकरण स्टार्टअप इंडिया और I‑STEM के बीच डेटा प्रवाह को सहज बनाकर राष्ट्रीय अनुसंधान बुनियादी ढांचे की पहुँच को विस्तारित करेगा, जिससे नवाचार की गति बढ़ेगी और सार्वजनिक‑निजी सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

यह खबर क्यों अहम है

विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़ी उपलब्धियां प्रतियोगी परीक्षाओं के विज्ञान-प्रौद्योगिकी खंड में भी पूछी जाती हैं।

प्रतियोगी परीक्षा के नज़रिए से

  • प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने 06 नवम्बर 2026 को स्टार्टअप इंडिया‑I‑STEM एपीआई एकीकरण शुरू किया
  • DPIT (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) के सहयोग से यह पहल हुई
  • एकीकरण से DPIT‑मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय अनुसंधान सुविधाओं की जानकारी आसान होगी
  • प्रो. अजय कुमार सूद ने इस कदम को स्टार्टअप‑इंडस्ट्री‑एकेडेमिया तालमेल के रूप में बताया

परीक्षा की दृष्टि से

उपयोगी परीक्षाएं: UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, राज्य PCS

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एनओएस छात्रवृत्ति से आरव कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में पीएचडी की राह आसान की

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति (एनओएस) के तहत 28‑वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के पीएचडी छात्र आरव कुमार को ट्यूशन, रहने‑खर्च, यात्रा और अन्य शैक्षणिक व्यय के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की। यह सहायता 1 अक्टूबर 2024 को स्वीकृत हुई। आरव कुमार, जिनकी शैक्षणिक यात्रा में अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा की पहुँच और वित्तीय बाधाओं को कम करने की आवश्यकता थी, ने विदेश में डॉक्टरेट अध्ययन के दौरान ट्यूशन, आवास, यात्रा और अन्य आवश्यक खर्चों का सामना किया। एनओएस योजना के तहत मिली सहायता ने इन खर्चों को कवर किया, जिससे वे अपने शोध पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सके। मंत्रालय के प्रावधानों के अनुसार, सहायता में ट्यूशन फीस, रहने के खर्च, यात्रा और अन्य पात्र शैक्षणिक व्यय शामिल थे। इस समर्थन से आरव ने उन्नत शोध सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक विधियों का लाभ उठाया, जिससे उनके शोध प्रदर्शन और पेशेवर मार्गदर्शन में सुधार हुआ। परिवार के निरंतर प्रोत्साहन और मंत्रालय के संस्थागत समर्थन ने आरव की शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अब इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अपनी विशेषज्ञता को मजबूत करते हुए, भारत के लिए सार्थक शोध योगदान देने का लक्ष्य रख रहे हैं।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

भारत ने वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने की कार्ययोजना प्रस्तुत की

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की अंतरिक्ष संधारणीयता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उन्होंने हैदराबाद में 'कॉसमोसर्व स्पेस' की 'बेस-1' सुविधा का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक केंद्र अंतरिक्ष मलबे को सक्रिय रूप से हटाने और कक्षा में ही अंतरिक्ष सेवाएं प्रदान करने की दिशा में कार्य करेगा। हैदराबाद के गाचीबावली स्थित वीएसडी टेक पार्क में स्थापित यह सुविधा लगभग 14,800 वर्ग फुट में फैली है। यहां अंतरिक्ष रोबोटिक्स के डिजाइन, निर्माण और परीक्षण के लिए उन्नत प्रयोगशालाएं, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुकरण प्लेटफॉर्म और उपग्रह एकीकरण हेतु क्लीन रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस केंद्र के माध्यम से अंतरिक्ष में दो यानों को आपस में जोड़ने या थामने जैसी जटिल प्रक्रियाओं का अनुकरण किया जा सकेगा। उद्घाटन समारोह में तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू और कॉसमोसर्व स्पेस के संस्थापक डॉ. चिरंजीवी फणींद्र उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल को भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जुलाई 2026 में कंपनी द्वारा 'मिशन एम्ब्रेस' के तहत अंतरिक्ष में सॉफ्ट रोबोटिक पंखुड़ियों का सफल परीक्षण देश के निजी स्टार्टअप पारितंत्र की तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है। मंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री के अंतरिक्ष सुधारों के फलस्वरूप भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक से बढ़कर 450 तक पहुंच गई है। वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 9 अरब डॉलर की है, जिसे आगामी दशक में 40 से 45 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि अंतरिक्ष में निष्क्रिय उपग्रहों और रॉकेट के मलबे के कारण सक्रिय उपग्रहों के लिए खतरा बना रहता है। भारत की यह पहल न केवल राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर, बल्कि संपूर्ण मानवता के हित में सुरक्षित अंतरिक्ष वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक वैश्विक प्रयास है।

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आईपीआरडी-2026 का नई दिल्ली में शुभारंभ; वैज्ञानिक प्रगति को क्षेत्रीय सहयोग में रूपांतरित करने पर जोर

नई दिल्ली में आईपीआरडी-2026 का शुभारंभ हुआ, जहाँ वैज्ञानिक प्रगति को क्षेत्रीय सहयोग में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम में इस दिशा में कदम उठाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय‑बिहार सरकार ने जल निकायों से गाद निकासी व राष्ट्रीय राजमार्ग में उपयोग के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार ने जल निकायों से गाद की वैज्ञानिक निकासी तथा उसे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में उपयोग करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

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