केंद्रीय रेल मंत्री ने नई दिल्ली स्टेशन पर यात्री सुविधाएँ और सुरक्षा का निरीक्षण किया
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केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 06 नवंबर 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टेशन पर उपलब्ध यात्री सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्थाओं और दिवाली तथा छठ के त्योहारों के समय बढ़ती भीड़ से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। स्टेशन पर रोज़ाना 5 लाख से अधिक और त्योहारों के दौरान लगभग 8 लाख यात्रियों के आने-जाने को देखते हुए, विशेष होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त विशेष रेलगाड़ियों, आरपीएफ की तैनाती और 700 अतिरिक्त एआई कैमरों की व्यवस्था की गई है।
मंत्री ने यात्रियों से बातचीत करके सुविधाओं पर उनका फीडबैक भी लिया, जिसे यात्रियों ने संतोषजनक बताया। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे लगातार सेवाओं में सुधार कर रही है और यात्रियों को अधिक सहूलियत देने के लिए काम कर रही है।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए स्टेशन पर 700 से अधिक एआई कैमरे लगाए गए हैं, और प्रमुख स्टेशनों पर विशाल होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। अनारक्षित तथा आरक्षित टिकट वाले यात्रियों के लिए अलग होल्डिंग एरिया और सामान जांच सुविधा को स्टेशन भवन के बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे अंदर टिकट बुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले स्थान पर आरामदायक प्रतीक्षालय तैयार किया गया है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य अत्यधिक भीड़ के समय भी यात्रियों को व्यवस्थित और आरामदायक यात्रा का अनुभव कराना है।
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देश स्तर का यह घटनाक्रम आम नागरिकों, राज्यों और नीतियों पर असर डाल सकता है।
प्रतियोगी परीक्षा के नज़रिए से
- केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 06 नवंबर 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया
- नई दिल्ली स्टेशन पर 700 अतिरिक्त एआई कैमरे लगाए गए
- दिवाली और छठ के त्योहारों के दौरान प्रति वर्ष सबसे अधिक भीड़ होती है
- विशेष होल्डिंग एरिया और अतिरिक्त विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था की गई
परीक्षा की दृष्टि से
उपयोगी परीक्षाएं: UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, राज्य PCS
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संघ लोक सेवा आयोग ने संयुक्त आशुलिपिक (ग्रेड ‘बी’/‘I’) सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा 2020 के लिखित भाग के परिणाम जारी किए
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सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में वाहनों के उत्सर्जन को वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एनसीआर में बार‑बार होने वाले वायु प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को इसका मुख्य कारण बताया। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एनसीआर में ‘बंपर‑टू‑बंपर’ ट्रैफिक पर भी चिंता जताई और मौजूदा नियामक उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया। उन्होंने दिल्ली की सड़कों और गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद की ओर जाने वाली सड़कों पर चल रहे वाहनों की संख्या को बड़ी समस्या बताया। पीठ ने पूछा कि कई नियामक उपायों के बावजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 तक पहुँच रहा है। जब बताया गया कि दिल्ली में वाहनों की संख्या सबसे अधिक है, तो न्यायाधीश ने खुली छूट के कारणों पर प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश आदि से पंजीकृत वाहन दिल्ली में प्रवेश कर सकते हैं, पर प्रवेश स्थल पर ईंधन या वाहन की स्थिति की निगरानी नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान पराली जलाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पीठ ने किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन और व्यावहारिक विकल्पों के माध्यम से पराली जलाने से रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पराली को पूर्व‑निर्धारित दर पर खरीदने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। केंद्र ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान लगभग 14 प्रतिशत था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण से गरीब लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे सड़कों पर रहते हैं और त्योहारों के समय रोज़ी‑रोटी कमाते हैं।
