किलिमनोर में कार-ट्रेलर टक्कर में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल
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त्रिवेंद्रम के किलिमनोर के कुरवंकुज़ी में शुक्रवार को एक कार और ट्रेलर लॉरी के बीच टक्कर हुई। कार में थिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रन्नी के लिए यात्रा कर रहे यात्रियों को ले जा रहा था। टक्कर के बाद चालक जिन्सन (रन्नी) को गंभीर चोटें आईं और उन्हें त्रिवेंद्रम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। कार में मौजूद दो अन्य यात्रियों को कोई चोट नहीं आई। घटना की जांच के लिए पुलिस ने मामले की सूचना दर्ज की।
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अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 पोर्टल लॉन्च किया, ईसीएमएस में 12 स्वीकृत आवेदक घोषित
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में सेमीकॉन 2.0 वेब एप्लिकेशन पोर्टल का अनावरण किया और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत 12 स्वीकृत आवेदकों की घोषणा की। यह लॉन्च 06 नवम्बर 2026 को शाम 6:05 बजे PIB द्वारा प्रकाशित किया गया। सेमीकॉन 2.0 के दूसरे, तीसरे और चौथे स्तंभों के लिए आवेदन प्रक्रिया अब आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। इस पहल के तहत भारत सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय की मंजूरी दी है, जिससे सेमीकॉन 2.0 के छह रणनीतिक स्तंभों को सुदृढ़ किया जाएगा। पहले चरण, सेमीकॉन 1.0, में छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश के साथ स्वीकृति मिली थी, जिनमें से पाँच परियोजनाओं ने अक्टूबर 2026 तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया था। ईसीएमएस के तहत घोषित 12 इकाइयों में लगभग आधे हिस्से MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र से जुड़े हैं। मंत्री वैष्णव ने बताया कि भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण यात्रा अब केवल पुर्जों को जोड़ने के चरण से आगे बढ़कर मॉड्यूल, कलपुर्जे, सामग्री और उन्नत तकनीकों को शामिल करने वाली व्यापक घरेलू मूल्य श्रृंखला की ओर अग्रसर है। उन्होंने बैटरी सेल, कॉपर फॉयल, कॉपर‑क्लैड लैमिनेट और हाई‑एंड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड जैसे क्षेत्रों में बढ़ती उत्पादन क्षमता पर प्रकाश डाला। सेमीकॉन 2.0 का मुख्य उद्देश्य उपकरण, सामग्री, रसायन और गैसों के क्षेत्रों में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना है, जिसमें कम से कम तीन प्रमुख उपकरण निर्माताओं और पाँच रसायन‑गैस कंपनियों को भारत में लाना शामिल है। इस दिशा में सरकारी पहल से घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने और MSME को नए अवसर प्रदान करने की उम्मीद है। सेमीकॉन 2.0 पोर्टल के लॉन्च से उद्योग के विभिन्न हितधारकों को ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलेगी, जिससे आगे की परियोजनाओं के चयन और कार्यान्वयन में पारदर्शिता और गति आएगी। यह कदम भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने और रोजगार सृजन में होगा।
संघ लोक सेवा आयोग ने संयुक्त आशुलिपिक (ग्रेड ‘बी’/‘I’) सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा 2020 के लिखित भाग के परिणाम जारी किए
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने दिसंबर 2025 में आयोजित संयुक्त आशुलिपिक (ग्रेड ‘बी’/ग्रेड ‘I’) सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा, 2019‑2021 के वर्ष 2020 के लिखित भाग के परिणामों को 06 नवंबर 2026 को प्रकाशित किया। परिणामों में विभिन्न पीडब्ल्यूबीडी (PWBD) वर्गों के लिए अनुशंसित अभ्यर्थियों की श्रेणीवार सूचियाँ प्रस्तुत की गईं, जिसमें बैकलॉग और रिक्तियों की स्थिति का उल्लेख है। परिणाम घोषणा के अनुसार, PWBD‑1 में दो (01+01) बैकलॉग, PWBD‑2 में दो बैकलॉग, PWBD‑3 में दो (01+01) बैकलॉग तथा PWBD‑4 एवं PWBD‑5 में दो‑दो बैकलॉग शामिल हैं। साथ ही, कुछ वर्गों में कोई रिक्ति नहीं है, जबकि अन्य में एक‑एक रिक्ति या बैकलॉग दर्ज है। कुल 18 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिसमें श्रेणी‑IV के 17 और श्रेणी‑VI के 1 अभ्यर्थी शामिल हैं। परिणामों को सीलबंद लिफाफे में रखकर अभ्यर्थियों को प्रदान किया गया और UPSC की आधिकारिक वेबसाइट www.upsc.gov.in पर भी उपलब्ध कराया गया। अभ्यर्थी किसी भी प्रश्न या स्पष्टीकरण के लिए आयोग के कॉल सेंटर (011‑40303444/24041001) से प्रातः 09:00 बजे से रात्रि 20:00 बजे तक संपर्क कर सकते हैं। परिणामों के अंक, कट‑ऑफ आदि संबंधित जानकारी परिणाम घोषित होने की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। परिणामों के अंतिम चयन और घोषणा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के कार्यालय ज्ञापन संख्या 36012/16/2019‑Estt (Res.) दिनांक 12‑04‑2022 के दिशानिर्देशों तथा संबंधित न्यायिक मामलों के अंतिम निर्णयों के अधीन रहेगी। यह प्रक्रिया सभी चयनित अभ्यर्थियों के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में वाहनों के उत्सर्जन को वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एनसीआर में बार‑बार होने वाले वायु प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को इसका मुख्य कारण बताया। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एनसीआर में ‘बंपर‑टू‑बंपर’ ट्रैफिक पर भी चिंता जताई और मौजूदा नियामक उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया। उन्होंने दिल्ली की सड़कों और गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद की ओर जाने वाली सड़कों पर चल रहे वाहनों की संख्या को बड़ी समस्या बताया। पीठ ने पूछा कि कई नियामक उपायों के बावजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 तक पहुँच रहा है। जब बताया गया कि दिल्ली में वाहनों की संख्या सबसे अधिक है, तो न्यायाधीश ने खुली छूट के कारणों पर प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश आदि से पंजीकृत वाहन दिल्ली में प्रवेश कर सकते हैं, पर प्रवेश स्थल पर ईंधन या वाहन की स्थिति की निगरानी नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान पराली जलाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पीठ ने किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन और व्यावहारिक विकल्पों के माध्यम से पराली जलाने से रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पराली को पूर्व‑निर्धारित दर पर खरीदने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। केंद्र ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान लगभग 14 प्रतिशत था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण से गरीब लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे सड़कों पर रहते हैं और त्योहारों के समय रोज़ी‑रोटी कमाते हैं।
भारतीय वायुसेना के सॉफ़्टवेयर संस्थान ने IIT मद्रास व IITM‑प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज के साथ स्वदेशी डिजिटल संचार प्रणाली के लिए एमओए पर हस्ताक्षर किए
रक्षा मंत्रालय ने 6 नवंबर 2026 को दिल्ली में भारतीय वायुसेना के सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एसडीआई) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT‑Madras) तथा IIT‑M प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के बीच हवाई प्लेटफ़ॉर्म के लिए स्वदेशी डिजिटल सुरक्षित संचार प्रणाली विकसित करने हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस समारोह में एसडीआई के कमांडेंट‑एयर वाइस मार्शल सरबजीत सिंह और IIT‑M प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एम.जे. शंकर रमन ने दस्तख़त किए, जबकि IIT‑Madras के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी भी उपस्थित रहे। समझौते के तहत भारतीय वायुसेना, संचार प्रणालियों और नेटवर्किंग के लिए उन्नत एल्गोरिदम विकसित करने हेतु IIT‑Madras और IIT‑M प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के साथ मिलकर कार्य करेगी। यह सहयोग स्वदेशी डिजिटल संचार प्रणाली के डिजाइन, विकास और परीक्षण को कवर करेगा, जिससे आयातित तकनीकों पर निर्भरता घटेगी और वायुसेना की परिचालन दक्षता में सुधार होगा। दोनों संस्थाएँ इस पहल को आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के साथ संरेखित मान रही हैं। हस्ताक्षर समारोह में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने सहयोग के महत्व पर बल दिया। एसडीआई के कमांडेंट‑एयर ने कहा कि स्वदेशी समाधान भारतीय वायुसेना की रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करेंगे, जबकि IIT‑M प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज के सीईओ ने बताया कि उन्नत एल्गोरिदम और सुरक्षित संचार प्रोटोकॉल विकास में शैक्षणिक‑उद्योग सहयोग की आवश्यकता है। IIT‑Madras के निदेशक ने इस साझेदारी को राष्ट्रीय रक्षा तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने का अवसर बताया। यह MoU भारत के रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की व्यापक नीति के अनुरूप है। स्वदेशी डिजिटल संचार प्रणाली का विकास न केवल आयातित उपकरणों की लागत को कम करेगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को उच्च‑स्तरीय सॉफ्टवेयर एवं एन्क्रिप्शन तकनीकों में प्रतिस्पर्धात्मक बनाता है। इस पहल से भविष्य में वायुसेना के विभिन्न हवाई प्लेटफ़ॉर्म—जैसे लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और ड्रोन—पर सुरक्षित, तेज़ और विश्वसनीय डेटा ट्रांसमिशन संभव होगा। अंत में, इस सहयोग के परिणामस्वरूप विकसित होने वाली तकनीकें भारतीय वायुसेना के दैनिक संचालन में लागू की जाएँगी, जिससे पायलटों और ग्राउंड कंट्रोल के बीच संचार की विश्वसनीयता बढ़ेगी और मिशन सफलता दर में सुधार होगा। यह पहल रक्षा मंत्रालय की आत्मनिर्भरता और नवाचार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
