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सीआरपीएफ ने वार्षिक ऑपरेशंस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर काउंटर-टेरर ग्रिड और मणिपुर में सतर्कता बढ़ाने का निर्णय लिया

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

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सीआरपीएफ की वार्षिक ऑपरेशंस कॉन्फ्रेंस 2026 नई दिल्ली के बल मुख्यालय में बुधवार को आयोजित हुई। बैठक में बल के महानिदेशक जीपी सिंह ने जम्मू-कश्मीर के काउंटर-टेरर ग्रिड, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र और मणिपुर की सुरक्षा स्थिति पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।

सत्र में सभी थिएटरों के ऑपरेशनल तैयारियों, लॉजिस्टिक्स और क्षमता-निर्माण पर व्यापक समीक्षा की गई। जेएंडके, नॉर्थ ईस्ट, सेंट्रल, साउथ और आरएएफ सेक्टर के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख उपलब्धियों और जमीनी तैनाती के रोडमैप प्रस्तुत किये।

महानिदेशक ने विशेष रूप से लॉजिस्टिक सपोर्ट और प्रशिक्षण मॉड्यूल को बदलते माहौल के अनुरूप आधुनिक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नक्सल-मुक्त भारत की दिशा में काम करते हुए, सभी मोर्चों पर अत्यधिक सतर्कता बरतनी आवश्यक है।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर सीआरपीएफ की वीरता की प्रशंसा करते हुए उल्लेख किया कि पिछले एक वर्ष में किसी भी जवान की ऑपरेशनल मौत नहीं हुई है, जो 47 वर्ष पहले 1979 में स्थापित रिकॉर्ड को दोहराता है।

सीआरपीएफ के जवानों और अफसरों ने इस उपलब्धि के लिए अथक प्रयास किये हैं, जिनमें कुछ ने अपने शरीर के अंग खो दिए और कई घायल हुए, परन्तु वे फिर भी नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए जंगलों में लौटे।

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गृह मंत्रालय ने वीजा व्यवस्था में बदलाव कर मुख्य श्रेणियाँ घटाकर नौ की

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत की वीजा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की। 13 प्रमुख वीजा श्रेणियों को घटाकर नौ किया जाएगा और वीजा आवेदन फॉर्म को 70 प्रतिशत तक छोटा किया जाएगा। यह निर्णय नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक के बाद लिया गया। बैठक में वीजा मैनुअल, 2019 के विभिन्न अध्यायों और परिशिष्ट-1 व 2 में संशोधन पर चर्चा हुई। इसके अंतर्गत मुख्य श्रेणियों की संख्या 13 से घटाकर नौ और उप-श्रेणियों की संख्या 49 से घटाकर 23 करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, आवेदन फॉर्म में मौजूद 70 प्रतिशत कालम हटाकर फॉर्म को सरल और उपयोग में आसान बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यह कदम वीजा प्रक्रिया को तर्कसंगत और सरल बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अनावश्यक और दोहराव वाले फ़ील्ड हटाकर आवेदन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाएगा। इस बदलाव का प्रभाव भारतीय नागरिकों और विदेशियों दोनों पर पड़ेगा। कम श्रेणियों के कारण वीजा आवेदन के विकल्प सीमित होंगे, परंतु आवेदन प्रक्रिया में समय और प्रयास दोनों की बचत होगी। वर्तमान में, वीजा मैनुअल के संशोधन के बाद नई प्रक्रियाएँ लागू होने की तिथि और विस्तृत मार्गदर्शन जल्द ही जारी किया जाएगा।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

ISRO ने NVS-03 की अंतिम ऑर्बिट-रेजिंग पूरी कर NavIC नेटवर्क को मिली मजबूती

ISRO ने अपने नवीनतम उपग्रह NVS-03 की तीसरी और अंतिम ऑर्बिट‑रेजिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, जिससे यह जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित हो गया है। उपग्रह को 30 अक्टूबर 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV‑F18 राकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया था। लांच के बाद, NVS-03 को प्रारम्भिक ट्रांसफर कक्षा में रखा गया और फिर कई चरणों में ऊँची कक्षा तक पहुँचाया गया। तीसरी ऑर्बिट‑रेजिंग के बाद उपग्रह अपनी निर्धारित जियोसिंक्रोनस स्थिति पर पहुँच गया। NVS-03 का NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) सिस्टम में समावेश भारत के अपने नेविगेशन नेटवर्क को और सुदृढ़ करेगा। NavIC, अमेरिका के GPS के समान, पूरे भारतीय भूभाग और सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक सटीक लोकेशन और समय की जानकारी देता है। इसरो के अधिकारियों ने बताया कि यह कदम भारत को विदेशी उपग्रह नेटवर्क पर निर्भरता कम करने और महत्वपूर्ण नेविगेशन व टाइमिंग सेवाओं पर बेहतर नियंत्रण देने में मदद करेगा। इस तैनाती से NavIC की पोजिशनिंग क्षमताएँ पूरी तरह से बहाल हो जाएँगी, जिससे देश के भीतर और बाहर दोनों ही स्थानों पर नेविगेशन सेवाएँ अधिक विश्वसनीय होंगी।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने 27 साल पुराने फैसले के आधार पर राज्यों को अतिरिक्त बिक्री कर लगाने का अधिकार बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह पुष्टि की कि राज्यों को अतिरिक्त बिक्री कर या सरचार्ज लगाने का अधिकार संविधान के 1974 के पूर्वनिर्णय के अनुसार वैध है। यह फैसला सात-जजों की संविधान पीठ द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत ने की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1974 के "एस कोदार बनाम केरल राज्य" के फैसले में स्थापित सिद्धांत अभी भी प्रभावी हैं। उस निर्णय में कहा गया था कि अतिरिक्त बिक्री कर मूल रूप से बिक्री कर की दर में वृद्धि है, न कि डीलरों की आय पर नया कर। इस आधार पर, राज्य विधायिकाओं को मौजूदा बिक्री कर के प्रतिशत के रूप में अतिरिक्त कर या सरचार्ज निर्धारित करने की वैधानिक शक्ति प्राप्त है। सात-जजों की पीठ में सीजेआइ सूर्यकांत के अलावा जस्टिस के.वी. विश्वनाथन, जस्टिस एस.वी. भट्टी, जस्टिस जोयमल्या बागची, जस्टिस एन.वी. अंजारिया, जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। उन्होंने कहा कि वैधानिक प्रावधानों में हुए संशोधनों और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कार्यान्वयन के बाद इस मुद्दे को पुनः विचार करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह अब मुख्यतः सैद्धांतिक विवाद बन चुका है। विवाद की जड़ ओडिशा सेल्स टैक्स एक्ट, 1947 की धारा 5ए में निहित थी, जिसके तहत निश्चित टर्नओवर वाले डीलरों पर 10 से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त कर लगाया जाता था। याचिकाकर्ताओं ने यह प्रश्न उठाया था कि क्या यह कर राज्य की सातवीं अनुसूची की द्वितीय सूची की प्रविष्टि 54 के तहत वैध है, या यह आय पर कर के रूप में संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया कि 2017 में जीएसटी व्यवस्था के लागू होने के बाद यह मुद्दा केवल शैक्षणिक स्तर पर ही रह गया है, क्योंकि जीएसटी ने कई पूर्व कर प्रावधानों को समाहित कर लिया है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सैद्धांतिक रूप से समाप्त कर दिया, जिससे राज्य सरकारों को अतिरिक्त बिक्री कर लगाने की मौजूदा शक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने बाल श्रम (संशोधन) अधिनियम 2016 के कार्यान्वयन हेतु विशेष प्रकोष्ठ बनाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु केंद्र को विशेष प्रकोष्ठ गठित करने का आदेश दिया। यह निर्देश जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने दिया, जिसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी करने को कहा गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि विशेष प्रकोष्ठ का कार्य बाल श्रम संशोधन अधिनियम 2016 के प्रविधानों की निगरानी करना होगा, विशेषकर खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करना। इस अधिनियम ने 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सभी व्यवसायों में कार्यस्थल से दूर रखने का प्रावधान किया है और मूल बाल श्रम अधिनियम 1986 में व्यापक संशोधन किया। याचिकाकर्ता, गैर-सरकारी संगठन हेल्थ फोर मिलियन्स, के अधिवक्ता प्रशांत भूषण और प्रणव सचदेव ने इस मामले को अदालत में लाया, जिसमें उन्होंने बाल श्रमिकों के लिए शिक्षा सुविधाएं और दिन में दो बार भोजन उपलब्ध कराने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान केंद्र के वकील ने बताया कि मूल अधिनियम में संशोधन के बाद अधिकांश शिकायतें निपट गई हैं, इसलिए रिट याचिका पर आगे विचार नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में मांगी गई अतिरिक्त मांगों को खारिज करते हुए कहा कि संशोधन अधिनियम के तहत किए गए बदलावों को पूरी तरह प्रभावी करना शेष है। इस निर्णय के बाद, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को राज्यों के मुख्य सचिवों के सहयोग से प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी करने और विशेष प्रकोष्ठ की निगरानी को सुदृढ़ करने का कार्य सौंपा गया। यह कदम बाल श्रम के निरोध में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति दर्शाता है, जिससे न केवल खतरनाक उद्योगों में बाल श्रमिकों की भर्ती पर रोक लगेगी, बल्कि मौजूदा नियमों की प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित होगी। भविष्य में विशेष प्रकोष्ठ के कार्यों के आधार पर बाल श्रम के उल्लंघन के मामलों में तेज़ी से कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है, जिससे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा में सुधार होगा।

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