NHAI बनायेगा राज्यों के लिए 'ईज़ ऑफ कंस्ट्रक्शन इंडेक्स', हाईवे में देरी से वार्षिक 3000 करोड़ का नुकसान
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NHAI ने घोषणा की है कि वह राज्यों के लिए ‘ईज़ ऑफ कंस्ट्रक्शन इंडेक्स’ तैयार करेगा, ताकि सरकारी औपचारिकताओं के कारण परियोजनाओं में हो रही देरी को उजागर किया जा सके।
इस इंडेक्स के अंतर्गत हर राज्य की निर्माण प्रक्रियाओं का मूल्यांकन किया जाएगा, जैसे कि जमीन प्राप्ति, मिट्टी की अनुमति, यूटिलिटी और पर्यावरण स्वीकृति के समय। इसके आधार पर रैंकिंग बनाई जाएगी और बेहतर व्यवस्था वाले राज्यों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
चैयरमैन संतोष यादव ने बताया कि यदि किसी परियोजना में एक वर्ष का भी विलंब होता है तो लगभग 3000 करोड़ रुपये का टोल शुल्क का नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, बिहार में 1700 किलोमीटर की परियोजनाओं पर 60 हजार करोड़ रुपये की लागत लगती है, और एक वर्ष के विलंब से लगभग तीन हजार करोड़ रुपये का राजस्व घटता है।
वह आगे कहते हैं कि यदि सरकारी औपचारिकताओं के कारण देरी होती है तो वित्तीय नुकसान एनएचएआई या सरकार को उठाना पड़ता है, जबकि ठेकेदार को मुआवजा देना पड़ सकता है।
इस पहल का उद्देश्य राज्यों को निर्माण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में समय पर प्रगति हो और आर्थिक नुकसान घटे।
यह खबर क्यों अहम है
देश स्तर का यह घटनाक्रम आम नागरिकों, राज्यों और नीतियों पर असर डाल सकता है।
प्रतियोगी परीक्षा के नज़रिए से
- NHAI ने राज्यों के लिए ‘ईज़ ऑफ कंस्ट्रक्शन इंडेक्स’ तैयार करने का निर्णय लिया
- प्रत्येक वर्ष परियोजनाओं में देरी से लगभग 3000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है
- इंडेक्स में रैंकिंग के आधार पर बेहतर व्यवस्था वाले राज्यों को प्रोत्साहन दिया जाएगा
परीक्षा की दृष्टि से
विषय: रिपोर्ट और सूचकांक
उपयोगी परीक्षाएं: UPSC, बैंकिंग, राज्य PCS
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