गृह मंत्रालय ने वीजा व्यवस्था में बदलाव कर मुख्य श्रेणियाँ घटाकर नौ की
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत की वीजा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की। 13 प्रमुख वीजा श्रेणियों को घटाकर नौ किया जाएगा और वीजा आवेदन फॉर्म को 70 प्रतिशत तक छोटा किया जाएगा। यह निर्णय नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक के बाद लिया गया।
बैठक में वीजा मैनुअल, 2019 के विभिन्न अध्यायों और परिशिष्ट-1 व 2 में संशोधन पर चर्चा हुई। इसके अंतर्गत मुख्य श्रेणियों की संख्या 13 से घटाकर नौ और उप-श्रेणियों की संख्या 49 से घटाकर 23 करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, आवेदन फॉर्म में मौजूद 70 प्रतिशत कालम हटाकर फॉर्म को सरल और उपयोग में आसान बनाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, यह कदम वीजा प्रक्रिया को तर्कसंगत और सरल बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अनावश्यक और दोहराव वाले फ़ील्ड हटाकर आवेदन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाएगा।
इस बदलाव का प्रभाव भारतीय नागरिकों और विदेशियों दोनों पर पड़ेगा। कम श्रेणियों के कारण वीजा आवेदन के विकल्प सीमित होंगे, परंतु आवेदन प्रक्रिया में समय और प्रयास दोनों की बचत होगी।
वर्तमान में, वीजा मैनुअल के संशोधन के बाद नई प्रक्रियाएँ लागू होने की तिथि और विस्तृत मार्गदर्शन जल्द ही जारी किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के 30 अक्टूबर को जारी आदेश पर रोक लगाई, जिसमें चिदंबरम स्थित प्राचीन नटराज मंदिर के प्रशासन को सुधारने हेतु एक प्रबंधन बोर्ड गठित करने का प्रावधान था। यह रोक जस्टिस अरविंद कुमार और विपुल पांचोली की पीठ ने दीक्षितरों – मंदिर के न्यासी और पुजारी – की अपील पर जारी की, जिससे बोर्ड गठन की प्रक्रिया अस्थायी रूप से स्थगित हो गई। हाई कोर्ट ने मूल रूप से यह आदेश दिया था क्योंकि पोदु दीक्षितरों के हाथों में मंदिर का प्रबंधन होने के बावजूद कुप्रबंधन की शिकायतें थीं। कोर्ट ने बताया कि मंदिर परिसर में गैर‑धार्मिक व्यावसायिक गतिविधियों, विशेषकर एक "फूड कोर्ट" की स्थापना, ने धार्मिक माहौल को बिगाड़ दिया था। इन समस्याओं को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से युक्त एक प्रबंधन बोर्ड की सिफारिश की गई थी, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस वी. भरतिदासन अध्यक्ष, जस्टिस आर. सुरेश कुमार सह‑अध्यक्ष, तथा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सी. राजेंद्रन सदस्य के रूप में शामिल थे। दीक्षितरों की ओर से दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया और पक्षों के वकीलों की सुनवाई के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि अपील में उठाए गए प्रश्नों को सुनने के बाद उनका विचार है कि मौजूदा निर्णय को स्थगित किया जाना चाहिए, जिससे प्रबंधन बोर्ड का गठन अभी के लिए रोका जा सके। पृष्ठभूमि में यह स्पष्ट है कि मंदिर के दैनिक पूजा, त्योहारों और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का अधिकार पोदु दीक्षितरों को ही है, और उन्होंने इन कार्यों को स्थापित परंपराओं के भीतर ही जारी रखने का आश्वासन दिया है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि मंदिर की संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, और पारदर्शी प्रशासन ही कुप्रबंधन को समाप्त करने का एकमात्र उपाय है। सुप्रीम कोर्ट की इस रोक से मंदिर के प्रबंधन में अस्थायी अनिश्चितता बनी रहेगी, परन्तु दीक्षितरों को अपने धार्मिक कर्तव्यों को जारी रखने की अनुमति मिलती रहेगी। आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि प्रबंधन बोर्ड का गठन कब और किस रूप में लागू किया जाएगा, जिससे मंदिर के भक्तों और स्थानीय समुदाय पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा।
