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सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम नटराज मंदिर के प्रबंधन बोर्ड आदेश पर रोक लगाई

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

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सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के 30 अक्टूबर को जारी आदेश पर रोक लगाई, जिसमें चिदंबरम स्थित प्राचीन नटराज मंदिर के प्रशासन को सुधारने हेतु एक प्रबंधन बोर्ड गठित करने का प्रावधान था। यह रोक जस्टिस अरविंद कुमार और विपुल पांचोली की पीठ ने दीक्षितरों – मंदिर के न्यासी और पुजारी – की अपील पर जारी की, जिससे बोर्ड गठन की प्रक्रिया अस्थायी रूप से स्थगित हो गई।

हाई कोर्ट ने मूल रूप से यह आदेश दिया था क्योंकि पोदु दीक्षितरों के हाथों में मंदिर का प्रबंधन होने के बावजूद कुप्रबंधन की शिकायतें थीं। कोर्ट ने बताया कि मंदिर परिसर में गैर‑धार्मिक व्यावसायिक गतिविधियों, विशेषकर एक "फूड कोर्ट" की स्थापना, ने धार्मिक माहौल को बिगाड़ दिया था। इन समस्याओं को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से युक्त एक प्रबंधन बोर्ड की सिफारिश की गई थी, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस वी. भरतिदासन अध्यक्ष, जस्टिस आर. सुरेश कुमार सह‑अध्यक्ष, तथा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सी. राजेंद्रन सदस्य के रूप में शामिल थे।

दीक्षितरों की ओर से दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया और पक्षों के वकीलों की सुनवाई के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि अपील में उठाए गए प्रश्नों को सुनने के बाद उनका विचार है कि मौजूदा निर्णय को स्थगित किया जाना चाहिए, जिससे प्रबंधन बोर्ड का गठन अभी के लिए रोका जा सके।

पृष्ठभूमि में यह स्पष्ट है कि मंदिर के दैनिक पूजा, त्योहारों और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का अधिकार पोदु दीक्षितरों को ही है, और उन्होंने इन कार्यों को स्थापित परंपराओं के भीतर ही जारी रखने का आश्वासन दिया है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि मंदिर की संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, और पारदर्शी प्रशासन ही कुप्रबंधन को समाप्त करने का एकमात्र उपाय है।

सुप्रीम कोर्ट की इस रोक से मंदिर के प्रबंधन में अस्थायी अनिश्चितता बनी रहेगी, परन्तु दीक्षितरों को अपने धार्मिक कर्तव्यों को जारी रखने की अनुमति मिलती रहेगी। आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि प्रबंधन बोर्ड का गठन कब और किस रूप में लागू किया जाएगा, जिससे मंदिर के भक्तों और स्थानीय समुदाय पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा।

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ट्रंप की स्पेस फ्रीडम डिक्लेरेशन से चंद्रमा पर प्रतिस्पर्धा, भारत के लिए चुनौती

ट्रम्प ने मिडटर्म चुनावों के दौरान अमेरिकी स्पेस फ्रीडम डिक्लेरेशन जारी कर कहा कि अमेरिका 2028 तक चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति स्थापित करेगा और मंगल पर मानव मिशन का लक्ष्य रखेगा। यह घोषणा अंतरिक्ष में अमेरिकी नेतृत्व को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा को जोड़ती है। डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु के अनुसार, इस कदम से अंतरिक्ष के नियमन और साझा क्षेत्र के सिद्धांतों पर बड़ा भू‑राजनीतिक प्रश्न उठता है। स्पेस थिंक टैंक स्पेसपोर्ट सारभाई की निदेशक सुस्मिता मोहंती ने बताया कि ट्रम्प एक ओर अंतरिक्ष को सभी मनुष्यों का क्षेत्र कहते हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी नागरिकों की स्थायी उपस्थिति की बात करते हैं, जिससे दोहरे संदेश में तनाव स्पष्ट है। भारतीय स्पेस एसोसिएशन के महानिदेशक (सेवानिवृत्त) लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट का मानना है कि यह घोषणा अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले प्रतिस्पर्धी ढांचों की ओर इशारा करती है। उन्होंने कहा कि अब आर्टेमिस समूह और चीन‑रूस के आईएलआरएस समूह के बीच स्पष्ट विभाजन दिख रहा है, जिससे स्पेस उपनिवेशीकरण और स्वामित्व जैसे मुद्दे भविष्य में टकराव के बीज बन सकते हैं। भारत ने 2023 में आर्टेमिस अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए हैं, पर 1979 के मून एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने के बावजूद अभी तक उसे अनुमोदित नहीं किया है। अगस्त 2026 में नासा ने इसरो को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का निमंत्रण दिया, जिससे भारत की चंद्रमा मानव मिशन की दिशा में गति तेज हो सकती है। भट्ट के अनुसार, भारत को अपनी स्थिति पर व्यापक राष्ट्रीय बहस करनी चाहिए और प्रतिस्पर्धी स्पेस शक्तियों के साथ सहयोग करते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए। इस संदर्भ में भारत का स्पेस विजन 2047, जिसमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक मानव चंद्रमा लैंडिंग शामिल है, भविष्य की नीति दिशा को निर्धारित करेगा।

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मोदी सरकार ने दीपावली पर बुजुर्गों के अकेलेपन को खत्म करने के लिए वयो सम्मान राष्ट्रीय अभियान शुरू किया

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने दीपावली के अवसर पर 'वयो सम्मान राष्ट्रीय अभियान' का शुभारम्भ किया, जिसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को अकेलेपन से बचाना और पीढ़ियों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करना है। इस पहल को अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत लागू किया गया है और इसे हर गांव व मोहल्ले तक पहुँचाने के लिए पंचायतों, स्थानीय निकायों और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से कार्यान्वित किया जाएगा। मंत्री ने नागरिकों से अपील की कि दीपावली के दौरान अपने घरों या आस‑पड़ोस में कोई भी वरिष्ठ नागरिक अकेला न रहे और उनके सम्मान में एक दीया जलाया जाए। वयो सम्मान राष्ट्रीय अभियान का लक्ष्य वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव, ज्ञान और सामाजिक योगदान को पहचानना तथा उनका सम्मान करना है। इस संदर्भ में मंत्री ने कहा कि युवा वर्ग बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया से जोड़ेंगे, जबकि बुजुर्ग युवा वर्ग को जीवन के मूल्यों की शिक्षा देंगे। आंकड़ों के अनुसार, 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या 2011 में लगभग 10 करोड़ थी, जो 2036 तक 23 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान है। शहरीकरण, प्रवास और बदलते पारिवारिक संरचनाओं के कारण पीढ़ियों के बीच संवाद में कमी आई है, जिससे बुजुर्गों में अकेलेपन, कल्याणकारी योजनाओं की सीमित जानकारी और साइबर धोखाधड़ी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। यह अभियान न केवल सामाजिक बंधन को मजबूत करेगा, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा एवं डिजिटल साक्षरता के लाभ भी प्रदान करेगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार की संभावना बनी रहेगी।

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गोवा के गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस ने शुरू किया 15‑दिवसीय 'मैरेज रेडिनेस' सर्टिफिकेट कोर्स

गोवा के पणजी स्थित गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस ने युवा वर्ग के लिए "मैरेज रेडिनेस" नामक एक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स लॉन्च किया है। यह कोर्स 15 दिन तक चलेगा और 2 से 17 दिसंबर, 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा। कॉलेज के मानव विकास और परिवार अध्ययन विभाग ने इस पहल को तैयार किया है, जिसका उद्देश्य युवाओं को स्वस्थ, स्थायी रिश्तों और वैवाहिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है। कोर्स में "डेटिंग के उद्देश्य और गतिशीलता", "आत्म‑जागृति और अपनेपन की जरूरत", "रिश्तों पर पुरुषत्व और स्त्रीत्व का प्रभाव" तथा "शादी और वैवाहिक जीवन के बीच का मूल अंतर" जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। यह कार्यक्रम स्नातक, स्नातकोत्तर और सभी अविवाहित युवाओं के लिए खुला रहेगा। कॉलेज के प्रिंसिपल महेश पाई ने बताया कि यह कोर्स केवल शादी की रस्मों की तैयारी तक सीमित नहीं, बल्कि दो दिलों के बीच आपसी समझ, अटूट प्रतिबद्धता और वैवाहिक जीवन की वास्तविक जिम्मेदारियों को समझाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, "समाज में रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है, इसलिए इस तरह की शिक्षा आवश्यक है।" गोवा के विधि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच राज्य की सिविल अदालतों में तीन हजार से अधिक विवाह‑तलाक से जुड़े मामले दर्ज हुए, जिसमें अकेले 2024 में 947 मामले शामिल थे। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए हाल ही में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्री‑मैरेज काउंसलिंग शुरू करने की बात कही थी, जिससे कॉलेज की इस पहल का सामाजिक महत्व और स्पष्ट हो गया। कोर्स के सफल समापन के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम यह संकेत देता है कि शैक्षणिक संस्थान अब केवल पेशेवर कौशल ही नहीं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण सामाजिक पहलुओं की तैयारी में भी भूमिका निभा रहे हैं।

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रवि उप्पल को यूएई में गिरफ्तार, भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू

रवि उप्पल, महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप के सह-प्रवर्तक, को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है और भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आरम्भ हो गई है। यह कदम तब आया जब भारतीय एजेंसियों ने उप्पल के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया था। उप्पल को 46 वर्ष की आयु में दुबई के अधिकारियों ने तब रोका जब भारतीय जांच एजेंसियों के अनुरोध पर रेड नोटिस जारी हुआ था। उसी समय, सीबीआई की एक टीम ने एक नवंबर को ओमान से महादेव एप के अन्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को वापस भारत ले आई। चंद्राकर और उप्पल दोनों छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई शहर के निवासी हैं। महादेव एप का कार्य 2019-20 में शुरू हुआ और 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई। एप के अनुसार, 2019 से अब तक इसने लगभग 80,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। इंटरपोल रेड नोटिस के बाद दुबई के अधिकारियों ने उप्पल को गिरफ्तार किया, जबकि 2023 में यूएई के अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया था, पर बाद में पता चला कि वह ऑस्ट्रेलिया में था। भारतीय एजेंसियां, विशेषकर सीबीआई और ईडी, उप्पल को भारत प्रत्यर्पित कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इस घटना से स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध ऑनलाइन जुआ गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है और भारतीय एजेंसियों के साथ विदेशी अधिकारियों का सहयोग बढ़ रहा है।

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