अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत और तुर्किये की कंपनियों पर ईरान से जुड़ाव के आरोप में प्रतिबंध लगाए
प्रकाशित:
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को ईरान से संबंध रखने के आरोप में भारत और तुर्किये स्थित कंपनियों तथा कुछ व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लागू किए।
मंत्रालय ने चेतावनी दी कि वह ईरानी शासन का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। यह कदम ट्रम्प प्रशासन के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के अंतर्गत आता है, जिसका उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री से जुटाई जाने वाली धनराशि को रोकना है।
भारत में रहने वाले सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनके दो व्यापारिक साझेदारों पर तथा शर्मा से जुड़ी नौ अन्य संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय कंपनियों ने ईरानी तेल की ढुलाई में शामिल प्रतिबंधित जहाजों को गलत पहचान और प्रमाणपत्र मुहैया कराए।
तुर्किये स्थित फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध लगाए गए, जिसे ईरान के विमानन क्षेत्र को लगातार समर्थन देने का आरोप है।
मंत्रालय ने कहा कि इन कार्रवाइयों से ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँच रहा है, जिससे रियाल का मूल्य गिरा है और महंगाई दर 90 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
यह खबर क्यों अहम है
अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भारत की विदेश नीति, व्यापार और प्रवासी भारतीयों को प्रभावित कर सकती हैं।
इस खबर को शेयर करें
संबंधित खबरें
राष्ट्रपति ट्रंप ने रक्षा मंत्री हेगसेथ को हटाने पर विचार किया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद अपनी कैबिनेट में बदलाव पर विचार किया है। इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान हुआ, जिसके प्रमुख कारणों में से एक ईरान युद्ध को बताया गया है। इस पृष्ठभूमि में ट्रंप ने अपने करीबी सलाहकारों से रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को हटाने की संभावना पर चर्चा की। हालाँकि, ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए हेगसेथ को हटाने से इनकार किया और कहा कि वह मंत्री पर भरोसा रखते हैं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने भी इसी तरह का बयान दिया, जिसमें उन्होंने हेगसेथ के प्रति अपना विश्वास जताया। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के अधिकारियों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद सेना के शीर्ष अधिकारियों पर भी दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन को भी ईरान युद्ध से संबंधित सवालों का सामना करना पड़ सकता है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ईरान युद्ध को लेकर कलह है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर यह कहा कि हार का कारण युद्ध है। रक्षा मंत्री के पद पर संभावित बदलाव की अटकलों के बीच, फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस को भी नामों में शामिल किया गया है। इस बीच, डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस के दोनों सदनों में मजबूत बहुमत मिलने के बाद हेगसेथ पर संसदीय दबाव बढ़ने की संभावना भी चर्चा में है।
अग्निपथ योजना में बदलाव: 75% अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेवा, कुल कार्यकाल छह साल
सेना के तीनों अंगों—थलसेना, वायुसेना और नौसेना—में लागू अग्निपथ योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस बदलाव को मंजूरी दी, जिससे 75 % अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवधि मिलेगा और उनका कुल कार्यकाल चार साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया गया। नए नियम के तहत, पहले की तरह केवल 25 % अग्निवीरों को चार साल की सेवा के बाद स्थायी पद दिया जाएगा। शेष 75 % को उनकी इच्छा के आधार पर दो साल की अतिरिक्त सेवा (सेकंड टूर ऑफ़ ड्यूटी) का प्रस्ताव दिया जाएगा। इस अतिरिक्त अवधि के समाप्त होने पर, यदि वे चयन मानदंडों को पूरा करते हैं, तो उन्हें नियमित सैनिक के रूप में शामिल किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह कदम योग्यता‑आधारित चयन को सुदृढ़ करेगा और सेना को अधिक फिट एवं भविष्य‑के‑चुनौतियों के लिए तैयार करेगा। इस निर्णय पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह केवल भर्ती नीति नहीं, बल्कि बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप भारतीय सेना को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उल्लेख किया कि चार या छह साल की सेवा पूरी करने के बाद, चयन मानदंडों को पूरा करने वाले अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में शामिल होने का अवसर मिलेगा। अग्निपथ योजना चार साल पहले शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य 17.5 से 21 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं को थलसेना, वायुसेना और नौसेना में जवान, एयरमैन और नाविक के पदों पर भर्ती करना है। योजना अफ़सर रैंक के लिए नहीं है; अफ़सरों की भर्ती अलग प्रक्रिया से होती है। कार्य शर्तें, राशन, यूनिफ़ॉर्म और यात्रा भत्ते पहले जैसी ही रहेंगी, पर महंगाई भत्ता और मिलिट्री सर्विस पे नहीं मिलेगा। सेवा के दौरान अग्निवीरों को स्वास्थ्य और कैंटीन सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी, पर छह साल की सेवा समाप्त होने पर उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी या पूर्व सैनिकों की मेडिकल एवं कैंटीन सुविधाएँ नहीं मिलेंगी। यह बदलाव भर्ती के बाद दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे सेना में युवा, फिट और तैयार बल का निर्माण संभव हो सके।
भारत और कनाडा ने पहला द्विपक्षीय रक्षा संवाद वर्चुअल रूप में आयोजित किया
भारत और कनाडा ने अपना पहला रक्षा संवाद 3 नवंबर 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) डॉ. अमित तेलंग और कनाडा के राष्ट्रीय रक्षा विभाग के सहायक उप‑मंत्री (नीति) श्री स्कॉट मिलर ने की। संवाद में दोनों देशों ने अपनी रक्षा नीतियों, रणनीतिक दृष्टिकोणों और सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। रक्षा औद्योगिक सहयोग, सैन्य‑तकनीकी सहभागिता तथा रक्षा अनुसंधान‑विकास को प्राथमिकता के रूप में उल्लेखित किया गया और इन्हें भविष्य के द्विपक्षीय सहयोग की मुख्य दिशा‑निर्देश माना गया। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। इस प्रतिबद्धता को 2 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा जारी संयुक्त बयान में भी स्पष्ट किया गया था। आगे के कार्य‑योजना के लिए निरंतर संपर्क बनाए रखने और प्रस्तावित उपायों को ठोस परिणामों में बदलने पर सहमति बनी। यह पहला रक्षा संवाद दोनों देशों के बीच सुरक्षा‑क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है, जिससे भविष्य में संयुक्त अभ्यास, तकनीकी साझेदारी और अनुसंधान परियोजनाओं की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं।
मिडटर्म चुनाव हार से डेमोक्रेट्स को हाउस में महाभियोग का बहुमत मिला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने छह जनवरी को रिपब्लिकन सांसदों को चेताया था कि मिडटर्म चुनाव जीतना अनिवार्य है, नहीं तो महाभियोग का बहाना मिल जाएगा। इस चेतावनी के बाद रिपब्लिकन पार्टी ने चुनाव में हार का सामना किया, जबकि डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस का नियंत्रण हासिल कर लिया। चुनाव के परिणामों से स्पष्ट हुआ कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 में से 367 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिनमें डेमोक्रेट्स ने 218 सीटें जीत कर बहुमत सुरक्षित किया। इससे पहले रिपब्लिकन के पास 218‑214 का न्यूनतम बहुमत था। अब डेमोक्रेट्स को महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार मिल गया है, क्योंकि हाउस में साधारण बहुमत आवश्यक है। डेमोक्रेटिक बहुमत के साथ, महाभियोग के दो प्रस्तावों का सामना कर चुके ट्रंप को अब फिर से हाउस में आरोपों की स्वीकृति मिल सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो‑तिहाई बहुमत चाहिए, जो केवल बहुमत से अधिक कठिन है। पिछले दो महाभियोग में ट्रंप को सीनेट ने बरी किया था, और वर्तमान में डेमोक्रेट्स के पास ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वे तीसरा महाभियोग पेश करेंगे। पार्श्वभूमि में यह उल्लेखनीय है कि मिडटर्म चुनाव से पहले सीनेट में रिपब्लिकन के पास 53 सीटें और डेमोक्रेट्स के पास 47 थीं। चुनाव के बाद टेक्सास, साउथ कैरोलाइना और कंसास जैसे पारंपरिक रिपब्लिकन गढ़ों में भी डेमोक्रेट्स ने सीनेट की सीटें जीत लीं, जिससे सीनेट में शक्ति संतुलन बदल गया। डेमोक्रेट्स के पास हाउस में बहुमत होने से न केवल महाभियोग की शुरुआत संभव है, बल्कि वे विधायी एजेंडे पर नियंत्रण और कार्यपालिका की निगरानी की शक्ति भी प्राप्त करेंगे। यह ट्रंप के शेष दो वर्षों के कार्यकाल में नई नीतियों को आगे बढ़ाने को कठिन बना सकता है, जबकि राष्ट्रपति ने पहले ही कहा था कि वह डेमोक्रेटिक बहुमत के विरुद्ध हर बिल पर वीटो करेंगे।
