भाजपा ने कांग्रेस‑सहयोगियों पर मतदाता सूची पुनरीक्षण और अराजकता मॉडल जारी रखने का हमला
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भाजपा ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों को मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अराजकता का मॉडल जारी रखेंगे। पार्टी ने इस कदम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अनादर और सामाजिक अस्थिरता का कारण बताया।
इन आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि विपक्षी गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा जारी है।
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भाजपा ने राहुल गांधी की संसद‑बाहरी बहस की मांग को संविधान और मतदाताओं का अपमान कहा
राहुल गांधी ने संसद में बहस से बचने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुली बहस की मांग करने के बाद भाजपा ने इस कदम को संविधान और मतदाताओं का अपमान बताया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 2023 में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान और मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बोलना शुरू होते ही राहुल गांधी लोकसभा से बाहर चले गए थे, और जब भी विपक्षी पक्ष चर्चा शुरू करता है, वह भाग जाता है। भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने यह भी कहा कि संसद को संविधान निर्माताओं ने बहस का सर्वोच्च मंच बनाया है, और यदि विपक्षी नेता संसद में बहस नहीं चाहता तो यह संविधान निर्माताओं की भावना का अपमान है। त्रिवेदी ने यह आरोप लगाया कि संसद के बाहर बहस की गांधी की मांग उन मतदाताओं का भी अपमान है, जिन्होंने उन्हें सांसद के रूप में चुना है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने इस बात को प्रश्नवाचक स्वर में उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद को संसद के बजाय सड़कों पर बहस करने की इच्छा क्यों है, और उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों का सदन ही ऐसी चर्चाओं का उचित मंच है। इस पर असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने सरमा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वह केंद्र में कांग्रेस सरकार बनने की आशंका से इस मुद्दे को उठाते हैं, जिससे उनके कथित अपराधों और भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। भाजपा ने राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्षी नेता के रूप में बहस से भागने और प्रधानमंत्री के साथ खुली बहस की मांग करने के लिए आलोचना की, और इसे "प्रतीकात्मक बहस" आयोजित करने की ओर इशारा किया। यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के बुधवार को पंजाब में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को खुली बहस की चुनौती दोहराने के बाद आई।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से ट्रंप की स्थिति कमजोर, भारत को व्यापार व एच‑1बी वीजा पर राहत की संभावना
अमेरिकी 2026 के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर नियंत्रण प्राप्त किया और सीनेट में महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज की, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई। इस बदलाव के कारण भारतीय उत्पादों पर शुल्क, व्यापार वार्ता और एच‑1‑बी वीजा नीतियों पर ट्रंप प्रशासन पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। डेमोक्रेटिक नियंत्रित हाउस संसदीय समितियों के माध्यम से प्रशासन की नीतियों की जांच कर सकता है, सुनवाई आयोजित कर सकता है और ट्रंप के कुछ महत्वाकांक्षी विधेयकों को चुनौती दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को व्यापार वार्ताओं में बेहतर सौदेबाजी की स्थिति मिल सकती है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक टैरिफ और रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त दबाव डाला था। डेमोक्रेटिक कांग्रेस टैरिफ नीतियों पर सुनवाई व जांच कर सकती है और राष्ट्रपति की टैरिफ लगाने की शक्तियों को सीमित करने के प्रयास कर सकती है। एच‑1‑बी वीजा पर भी बदलाव की संभावना है। ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में कुछ नए एच‑1‑बी आवेदनों पर एक लाख डॉलर की फीस लगाई थी, जिसे बाद में एक वर्ष और बढ़ा दिया गया। अदालतों ने कुछ मामलों में इस फीस के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है। भारतीय पेशेवर एच‑1‑बी स्वीकृतियों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, अतः इन नीतियों का सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा। डेमोक्रेटिक कांग्रेस इस फीस को कानून का रूप देने के प्रयास को रोक सकती है। रक्षा, प्रौद्योगिकी और इंडो‑पैसिफिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों अमेरिकी दलों का समर्थन जारी रहने की उम्मीद है। चीन को संतुलित करने की रणनीति, क्वाड सहयोग, रक्षा साझेदारी और सेमीकंडक्टर व कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में निरंतरता बनी रहेगी। रूस और ईरान से ऊर्जा खरीद पर डेमोक्रेटिक कांग्रेस का सख्त रुख भारत के ऊर्जा और रक्षा संतुलन पर अप्रत्यक्ष असर डाल सकता है, जबकि ट्रंप प्रशासन की कुछ नीतियों में बदलाव से भारत को व्यापार व वीजा के मोर्चे पर राहत मिल सकती है।
भाजपा ने राहुल गांधी पर संसद बहस से बचने का आरोप, खुली बहस की मांग पर अपमान जताया
भाजपा ने राहुल गांधी पर संसद में बहस से बचने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खुली बहस की मांग को अपमानित किया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को आरोप लगाया कि 2023 में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान, जब प्रधानमंत्री बोलना शुरू करते थे, राहुल गांधी लोकसभा से चले जाते थे। इसी तरह मणिपुर के मुद्दे पर भी वह उसी समय चले जाते थे। त्रिवेदी ने कहा कि विपक्षी नेता बहस के लिए तैयार होने का दावा करते हुए भी वास्तविक बहस से भागते हैं। भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने यह बात दोहराई कि संविधान निर्माताओं ने संसद को बहस का सर्वोच्च मंच बनाया है। यदि विपक्ष का नेता संसद में बहस नहीं चाहता, तो यह संविधान की मूल भावना का अपमान है। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी की बहस की मांग उन लोगों का अपमान है, जिन्होंने उन्हें सांसद के रूप में चुना है। भाजपा ने लोकसभा में विपक्षी नेता से हाल ही में आयोजित प्रतीकात्मक संसद के समान “प्रतीकात्मक बहस” आयोजित करने का आग्रह किया। यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के बुधवार को पंजाब में रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को खुली बहस की चुनौती दोहराने के बाद आई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सवाल किया कि राहुल गांधी संसद के बजाय सड़कों पर बहस क्यों करना चाहते हैं, और कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों का सदन ही ऐसी चर्चाओं के लिए उचित मंच है। सरमा के पलटवार में असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरमा को केंद्र में कांग्रेस सरकार बनने की आशंका है, जिससे उनके कथित अपराधों और भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। इस घटना के बाद भाजपा ने राहुल गांधी पर संसद बहस से बचने का आरोप लगाते हुए, खुली बहस की मांग को संविधान के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया।
सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को दिल्ली मतदाता सूची ‘फॉर्म 6’ स्पष्टीकरण पर सुनवाई करेगा
सुप्रीम कोर्ट ने 19 नवंबर को दिल्ली मतदाता सूची के ‘फॉर्म 6’ स्पष्टीकरण पर याचिकाओं की सुनवाई का आदेश दिया है। चुनाव आयोग ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान छूटे हुए मतदाताओं को ‘फार्म 6’ के माध्यम से अपना नाम फिर से सूची में जोड़ने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी से आग्रह किया कि वे उचित आवेदन दायर करें, जिसमें चुनाव आयोग के 3 नवंबर के स्पष्टीकरण को रिकार्ड पर रखा जाए। वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि 28 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के विपरीत, आयोग ने स्पष्ट किया कि 2026 की मतदाता सूची में मौजूद परंतु एसआइआर के दौरान हटाए गए नामों को ‘फार्म 8’ या गणना फार्म के माध्यम से फिर से पंजीकृत किया जा सकता है। चुनाव आयोग के संदेश में उल्लेख है कि मसौदा मतदाता सूची में न होने वाले मतदाताओं को ‘फार्म 6’ जमा करने पर, चाहे वे पहले सूची में रहे हों या नहीं, उन्हें अंतिम सूची में शामिल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को झूठा घोषणापत्र नहीं माना जाएगा, भले ही आवेदक ने पूर्व चुनावों में मतदान किया हो। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को आश्वस्त किया कि लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि अदालत इस विषय पर सुनवाई कर रही है। इस सुनवाई के बाद निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि ‘फॉर्म 6’ के तहत नाम जोड़ने की प्रक्रिया को कैसे लागू किया जाएगा और क्या इससे मतदाता सूची में किसी प्रकार का बदलाव होगा।
