यूक्रेन, अमेरिका और रूस के बीच एक सप्ताह में त्रिपक्षीय वार्ता की तैयारी, जेलेंस्की ने कहा
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बुधवार को बताया कि यूक्रेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच अधिकारियों के स्तर पर त्रिपक्षीय बातचीत एक सप्ताह के भीतर आयोजित की जा सकती है। यह सूचना उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ डेढ़ घंटे की विस्तृत चर्चा के बाद दी।
जेलेंस्की ने बताया कि वार्ता की रूपरेखा तैयार करने के लिए दोनों अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ उन्होंने गहन संवाद किया, जिसमें यूक्रेन‑अमेरिका‑रूस के बीच टीम‑स्तर पर बातचीत की संभावनाएँ शामिल थीं। उन्होंने कहा, "यह बातचीत एक सप्ताह से भी कम समय में होगी।" इस बीच, ब्रसेल्स में भी एक बड़ी बैठक आयोजित हुई, जिसमें यूक्रेन, अमेरिका, यूरोपीय संघ, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, नाटो, विश्व बैंक और वैश्विक कारोबारी समुदाय के प्रतिनिधि शामिल थे। उस मंच पर युद्ध‑पश्चात यूक्रेन के पुनर्निर्माण, सुरक्षा गारंटी और आर्थिक सहायता पर चर्चा हुई, और शुक्रवार को ब्रसेल्स में सुरक्षा‑गैरंटी पर एक और बैठक का प्रस्ताव रखा गया।
जेलेंस्की ने अमेरिकी पक्ष को अपने प्रमुख प्रस्तावों को सौंप दिया है और कहा कि यूक्रेन युद्ध को शीघ्र समाप्त करने के लिए सभी कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने हवाई सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली के इंटरसेप्टर की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे रूसी हवाई हमलों से नागरिकों की जान बचाई जा सके। साथ ही, उन्होंने प्रस्तावित ड्रोन समझौते के तहत द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का इरादा जताया और अमेरिकी समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
इन कूटनीतिक पहलों के बीच, रूसी हमलों से यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में भारी हताहत हुए हैं। जेलेंस्की ने 3 नवंबर को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, रूसी सेना ने 289 हमलावर ड्रोन, 17 बैलिस्टिक मिसाइल और 59 क्रूज मिसाइलें तैनात कीं, जिससे ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर गंभीर क्षति हुई और 29 लोगों की मौत हुई। ओडेसा, चेरकासी, झितोमिर, विनित्सिया, खार्किव, निप्रो, चेर्निवत्सी, चेर्निहाइव और रिव्ने सहित कई क्षेत्रों में बिजली कटौती की सूचना मिली।
अभी तक वार्ता का सटीक स्थान तय नहीं हुआ है, पर अमेरिकी विशेष दूत विटकॉफ ने 10‑11 नवंबर को अबू धाबी में यूक्रेन‑रूस‑अमेरिका के बीच मध्यस्थता वार्ता का प्रस्ताव रखा है। इस मंच पर युद्ध‑पश्चात सुरक्षा व्यवस्था, तनाव‑कम करने के उपाय, मानवीय सहायता और शांति‑समझौते की दिशा में कदमों पर चर्चा होगी, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और यूक्रेन के नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
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अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को भारत के व्यापारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और कई भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया, यह आरोप है कि उन्होंने ईरान के प्रतिबंधित तेल परिवहन को फर्जी झंडे व समुद्री प्रमाणपत्रों से संभव बनाया। वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, शर्मा‑शाहिद का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरानी पेट्रोलियम जहाजों को झूठी समुद्री पंजीकरण सेवाएँ प्रदान करता था। इस नेटवर्क ने 2014 से विभिन्न देशों के झंडे व रजिस्ट्रियों का नकल करके जहाजों को ‘शैडो फ्लीट’ के रूप में पंजीकृत किया, जिससे प्रतिबंधित जहाजों को संचालन जारी रखने की सुविधा मिली। दंपती ने चंडीगढ़ से इस संचालन का निर्देशन किया और कई देशों के अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग करके फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए। संयुक्त राज्य के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत, वित्त मंत्रालय ने शर्मा‑शाहिद के साथ जुड़े भारतीय नागरिक अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया, यह कहा गया कि वे नेटवर्क की कंपनियों में निदेशक के रूप में कार्यरत थे। इसके अतिरिक्त, नौ भारतीय कंपनियों और संस्थाओं, जिनमें ओशनिएक टेक्नोलॉजीज इंडिया, आर्यवर्त शिप मैनेजमेंट, प्रिसेप्ट ट्रेंड्स, पॉलिनेशिया मैरीटाइम, एलेक्सार्या फिनसर्व, एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, विहाराबोटिंग और आर्यवर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट शामिल हैं, पर भी प्रतिबंध लागू किया गया। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस कार्रवाई को दोहराते हुए कहा कि ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए प्रतिबंधित नेटवर्क को नष्ट करना जारी रहेगा और जो भी जमीन, समुद्र या हवाई मार्ग से ईरान की मदद करेंगे, उन्हें अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित जहाजों ने अरूबा, गुयाना, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर‑लेस्ते जैसी झूठी पंजीकरण सेवाओं का उपयोग किया था। यह कदम ईरान के तेल आय को कम करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारतीय कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध उनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग सेवाओं पर असर डाल सकते हैं, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी समान नेटवर्क को लक्षित करने के लिए अतिरिक्त प्रतिबंध जारी किए जा सकते हैं।
ट्रम्प ने ईरान युद्ध को रिपब्लिकन हार की मुख्य वजह बताया, व्हाइट हाउस ने 'नेवर सरेंडर' संदेश साझा किया
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बेंगलुरु में अमेरिकी नागरिकों ने डेमोक्रेटिक जीत का जश्न मनाया, कहा बदलाव की जरूरत थी
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