हिंद-प्रशांत संवाद में नौसेना प्रमुख ने समुद्री सुरक्षा के कारकों की सामूहिक समझ बढ़ाने की पैरवी की
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हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (IPRD) के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों की समझ को गहरा करने और क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह बयान नई दिल्ली में आयोजित सत्र में बुधवार को दिया गया।
एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य तेज प्रतिस्पर्धा, बदलते शक्ति‑समीकरण, बड़े तकनीकी बदलाव और परस्पर प्रतिस्पर्धी रणनीतिक हितों के दौर से गुजर रहा है, और समुद्री क्षेत्र इन प्रवृत्तियों के केंद्र में स्थित है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जिनकी सामूहिक समझ बढ़ाने से ही प्रभावी सहयोग संभव होगा।
वक्ता ने उल्लेख किया कि नवंबर 2019 में बैंकाक में आयोजित 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंद‑प्रशांत महासागर पहल (IPOI) की घोषणा की थी। इस पहल ने सात स्तंभों के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग का ढांचा प्रस्तुत किया। IPRD 2026 का विषय‑विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग इन स्तंभों में से एक से सीधे जुड़ा है, जिससे संवाद का महत्व स्पष्ट होता है।
एडमिरल ने यह भी बताया कि हिंद‑प्रशांत शब्द की रणनीतिक अवधारणा से पहले ही प्रकृति ने दोनों महासागरों को सतह के नीचे जलधाराओं और सतह के ऊपर जलवायु के माध्यम से आपस में जोड़ दिया था। इंडोनेशियाई द्वीपसमूह से होकर समुद्री धाराएँ हर सेकंड लगभग 1.5 करोड़ घन मीटर पानी प्रशांत महासागर से हिंद महासागर में ले जाती हैं, जो इस प्राकृतिक जुड़ाव का प्रमाण है।
संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित थे और उन्होंने IPRD 2026 के एक सत्र में भाग लिया। एडमिरल ने साझा हितों को व्यावहारिक परिणामों में बदलने, दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं को सुदृढ़ करने और IPRD 2026 को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण, यद्यपि छोटी, भूमिका निभाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मंगलवार को मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारों तथा उनके पुलिस प्रमुखों को नाबालिग लड़कियों की खरीद‑फरोख्त से संबंधित मामलों में नोटिस भेजा। यह कार्रवाई उन मीडिया रिपोर्टों के बाद की गई है, जिनमें कहा गया है कि इन राज्यों के सीमावर्ती जिलों में कुछ माता‑पिता अपनी नाबालिग बेटियों को बिचौलियों को तीन से पाँच लाख रुपये में बेच रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बिचौलिए फर्जी दस्तावेज़ों की सहायता से इन लड़कियों की पहचान बदलते हैं और उन्हें महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में 35‑40 लाख रुपये की कीमत पर बेच दिया जाता है, जहाँ उन्हें यौन व्यापार के शिकार बनाया जाता है। NHRC ने इस जानकारी को स्वतः संज्ञान में लेते हुए कहा कि यदि इन दावों की सत्यता सिद्ध होती है, तो यह नाबालिग लड़कियों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। NHRC ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को दो सप्ताह के भीतर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। आयोग ने बताया कि नोटिस में संबंधित अधिकारियों से माँगी गई जानकारी में बिचौलियों के कार्य‑प्रणाली, फर्जी दस्तावेज़ों के प्रकार, बिक्री की कीमतें और पीड़ित लड़कियों की पहचान बदलने की प्रक्रिया शामिल होगी। इन राज्यों में नाबालिग लड़कियों की तस्करी की खबरें पहले भी सामने आई हैं, परन्तु इस बार राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार आयोग की सीधी भागीदारी ने मुद्दे को नई गंभीरता दी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में पीड़ितों को गोद ली हुई बेटियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे उनकी वास्तविक उम्र और पहचान छिपी रहती है। यदि आयोग की माँगी गई रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्य पुष्टि होते हैं, तो यह न केवल राज्य सरकारों और पुलिस बलों के लिए कड़ी जांच का कारण बन सकता है, बल्कि नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए नीतिगत सुधारों की आवश्यकता को भी उजागर करेगा। इस दिशा में आगे की कार्रवाई से संभावित रूप से तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद मिल सकती है।
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