तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर की नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात
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तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र अर्लेकर ने 06 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक प्रधानमंत्री कार्यालय, दिल्ली में आयोजित हुई। दोनों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, हालांकि विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया। मुलाकात के बाद दोनों ने आपसी सहयोग और राज्य‑केंद्र संबंधों को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर मल्टी‑लेन फ्री‑फ्लो टोलिंग हेतु मानकीकृत दिशानिर्देश जारी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 06 नवंबर 2026 को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा जारी दिशानिर्देशों की घोषणा की। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य चार‑लेन और उससे अधिक वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर मल्टी‑लेन फ्री‑फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली के लिए डिजाइन और बुनियादी ढांचे को मानकीकृत करना है। यह प्रावधान आगामी और वर्तमान में जारी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में निर्बाध, प्रौद्योगिकी‑आधारित, बाधा‑मुक्त टोल संग्रह को सुनिश्चित करेगा। दिशानिर्देशों में टोल प्लाजा के लेआउट, लेन कॉन्फ़िगरेशन, गैंट्री, सड़क अवसंरचना, प्रकाश व्यवस्था, सूचना पट्टिका और सहायक सुविधाओं के लिए समान आवश्यकताएँ निर्धारित की गई हैं। इन मानकों के तहत टोल बूथों पर वाहनों को रोके बिना टोल संग्रह संभव होगा, जिससे यातायात कतारें समाप्त होंगी, प्रतीक्षा समय घटेगा और टोल प्लाजा पर ईंधन की खपत कम होगी। एनएचएआई ने फील्ड कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे आगामी परियोजनाओं में इन आवश्यकताओं को शामिल करें और वर्तमान में जारी परियोजनाओं में संविदात्मक प्रावधानों के माध्यम से परिवर्तन लागू करें। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) चरण की परियोजनाओं में नया डिजाइन अनिवार्य होगा, जबकि पहले से ही अनुमोदित या निर्माणाधीन परियोजनाओं में परिवर्तन अनुबंध के माध्यम से स्वीकार्य होगा। सुरक्षा और उपयोगकर्ता सुविधा पर विशेष जोर दिया गया है। टोल प्लाजा पर उचित सूचना पट्टिका और इलेक्ट्रॉनिक परिवर्तनीय संदेश संकेत (वीएमएस) के साथ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, अग्रिम सूचना और मार्गदर्शन सुनिश्चित किया जाएगा। इन दिशानिर्देशों के लागू होने से राष्ट्रीय राजमार्ग यात्राओं को सुरक्षित, अधिक निर्बाध और पर्यावरण‑अनुकूल बनाया जाएगा, तथा टोलिंग क्षेत्र के माध्यम से यातायात की आवाजाही में सुधार होगा।
केरल हाई कोर्ट ने कैंपस में राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध, SFI छात्रों को परीक्षा से बाहर
केरल हाई कोर्ट के एक डिवीजन बेंच ने 3 नवंबर 2026 को एकल बेंच के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 16 छात्र संघ (SFI) के सक्रियकों को श्री संकराचार्य विश्वविद्यालय, कलाड़ी में सेमेस्टर परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी। यह कार्रवाई उन छात्रों के विरुद्ध थी, जिन्हें उपाध्यक्ष सीजा थॉमस की नकली अंत्यसंस्कार की घटना के बाद निलंबित किया गया था। विवादित घटना में छात्रों पर विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष को शारीरिक रूप से नुकसान पहुँचाने, उनका अपमान करने और उनकी कार को क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगा था, जिसके आधार पर कलाड़ी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। विश्वविद्यालय के सिंडिकेट ने एक जांच समिति गठित की, जिसने छात्रों को दोषी ठहराते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। SFI के सक्रियकों ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन 18 बिंदुओं की माँगों की सूची को उजागर करने के लिए था, जिसमें आवश्यक फैकल्टी की नियुक्ति और विभिन्न विभागों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने परीक्षा में भाग लेने के लिए उपस्थिति की कमी को माफ़ करने के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। केरल हाई कोर्ट ने 2017 के डॉ. एंटनी थॉमस बनाम वी.एम. मुहम्मद रफ़ीक और अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि धरना, हड़ताल, सत्याग्रह जैसी राजनीतिक गतिविधियों का संविधानिक लोकतंत्र में, विशेषकर शैक्षणिक संस्थानों में, कोई स्थान नहीं है। ऐसे कार्यों में संलग्न होने वाले छात्रों को निष्कासन या रूस्टिकेशन का जोखिम हो सकता है। न्यायालय ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के इस विचार को भी उद्धृत किया कि लोकतंत्र को केवल रूप में नहीं बल्कि वास्तविकता में बनाए रखने के लिए सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संविधानिक तरीकों का पालन करना आवश्यक है, और हिंसक या असहयोगी उपायों को त्यागना चाहिए। अब निलंबित छात्रों ने इस निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में राहत की याचिका दायर की है।
माली, म्यांमार, मेडागास्कर और इक्वेटोरियल गिनी के दूतों ने राष्ट्रपति भवन में परिचय-पत्र प्रस्तुत किए
राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने माली, म्यांमार, मेडागास्कर और इक्वेटोरियल गिनी के दूतों से परिचय-पत्र स्वीकार किए। इन चार देशों के राजदूतों ने भारत के प्रति अपनी औपचारिक कूटनीतिक मान्यता के तहत परिचय-पत्र प्रस्तुत किया, जिससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों की औपचारिक शुरुआत हुई। समारोह के दौरान दूतों ने भारत के साथ सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं।
खनन मंत्रियों के चौथे गोवा सम्मेलन में खनिज अन्वेषण तेज़ी और केंद्र-राज्य समन्वय की अपील
खान मंत्रालय ने 6 नवंबर 2026 को गोवा में आयोजित खनन मंत्रियों के चौथे दो दिवसीय सम्मेलन का समापन किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने खनिज अन्वेषण कार्यों में गति लाने और केंद्र-राज्य समन्वय को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन के दूसरे दिन प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई, जिसमें तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और केरल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में उपस्थित राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए, प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया और खनन क्षेत्र की चुनौतियों व संभावनाओं पर विस्तृत विमर्श किया। केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को देखते हुए, केंद्र और राज्यों के बीच मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने खनन के माध्यम से राज्य राजस्व में वृद्धि, खदानों की बेहतर योजना और बंद करने की प्रभावी प्रक्रियाओं की भी बात की। कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने खनन पहलों को तेज़ करने और देश को खनिज आत्मनिर्भर बनाने में राज्यों के सामूहिक प्रयासों के महत्व को दोहराया। खनन मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने बताया कि मंत्रालय ने भाग लेने वाले राज्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों को ध्यान में रखा है। उन्होंने बेहतर समन्वय और समयबद्ध समाधान के माध्यम से देरी तथा प्रक्रियागत बाधाओं जैसी चुनौतियों को दूर करने के आश्वासन दिए। सम्मेलन के दौरान सभी पक्षों ने विकसित भारत @2047 के विज़न के अनुरूप खनन क्षेत्र के विकास को तेज़ करने की नई प्रतिबद्धता व्यक्त की। समग्र रूप से, गोवा में संपन्न इस सम्मेलन ने केंद्र-राज्य सहयोग को सुदृढ़ करने, प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने और खनिज अन्वेषण में गति लाने के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश स्थापित किया। यह पहल न केवल खनन क्षेत्र की दक्षता बढ़ाएगी, बल्कि राज्य राजस्व में भी सकारात्मक योगदान देगी।
