राजस्थान हाई कोर्ट ने कन्हैयालाल हत्याकांड के आरोपियों की याचिकाएँ खारिज कर आतंकवाद की धाराओं में मुकदमा चलाने का निर्णय लिया
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जागरण संवाददाता, जयपुर – उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड के आठ आरोपितों पर आतंकवाद की धाराओं में ही मुकदमा चलेगा, यह निर्णय राजस्थान हाई कोर्ट ने लिया।
प्रधान न्यायाधीश संजय के अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने आरोपित मोहम्मद रियाज, मोहम्मद गौस सहित सभी की याचिकाएँ खारिज कर दीं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण में अधीनस्थ अदालत मिनी ट्रायल नहीं चला सकती, और यह देखना होता है कि अभियोजन पक्ष के सबूतों से प्रथम दृष्टया केस बनता है या नहीं।
मामले का मूल विवाद नूपुर शर्मा द्वारा कन्हैयालाल की टिप्पणियों को इंटरनेट पर शेयर करने के बाद उत्पन्न हुआ। इसके बाद आरोप है कि मोहम्मद गौस और रियाज ने दुकान में घुसकर कन्हैयालाल की धारदार हथियार से उसकी गर्दन काट दी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वीडियो, धमकियाँ और आरोपितों के बीच संबंध की जांच निचली अदालत के दौरान ही संभव है, अतः सभी आरोपितों पर आतंकवाद की धाराओं में ही मुकदमा चलाया जाएगा।
एनआइए की विशेष अदालत में आरोपितों के खिलाफ गैर‑कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम 1967, आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप तय किए गए थे।
आरोपितों के वकील मोहम्मद सलीम और सैयत सआदत अली ने बताया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि वे किसी आतंकवादी संगठन के सदस्य हैं।
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