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धनतेरस पर सोने-चांदी में निवेश से 14‑वर्षीय ट्रेंड पर मुनाफा

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

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सोने की कीमत 2012 के धनतेरस पर 31,643 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 18.40% बढ़ी। 2015 के धनतेरस पर यह 25,686 रुपये पर रही, जो 6.78% घट गई। 2020 के धनतेरस पर उछाल के साथ कीमत 50,600 रुपये पर पहुंची, 32.22% की वृद्धि के साथ। 2025 में कीमत 1,27,008 रुपये पर पहुंची, 60.30% की बढ़ोतरी के साथ। 5 नवंबर 2026 के धनतेरस पर यह 1,48,800 रुपये पर पहुंची, 15% की वृद्धि के साथ।

चांदी की कीमत 2012 के धनतेरस पर 60,920 रुपये प्रति किलोग्राम थी, 14.78% बढ़ी। 2014 में यह 98,730 रुपये पर रही, 40.98% की वृद्धि के साथ। 2025 में कीमत 1,56,604 रुपये पर पहुंची, 58.62% की बढ़ोतरी के साथ। 5 नवंबर 2026 के धनतेरस पर यह 1,94,500 रुपये पर पहुंची, 21.93% की वृद्धि के साथ।

अगस्त 2026 के बाद सोने की कीमतें पहली बार पिछले 20 दिनों के औसत भाव से ऊपर पहुंची हैं, जिससे संकेत मिलता है कि कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। 2026 की तीसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने 321 टन सोना खरीदा, जो पिछले वर्ष से 42% अधिक है।

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दिवाली के उपहार महँगे: पिस्ता, बादाम और अन्य सामग्री की कीमतें बढ़ी

दिवाली के उपहार महँगे हो रहे हैं क्योंकि घी, मक्खन, सूखे मेवे और चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं। पिस्ता की कीमतें पिछले दिवाली की तुलना में 60‑70% बढ़ गई हैं, जबकि बादाम की कीमतें 20‑40% बढ़ी हैं। इन बढ़ती इनपुट लागतों के साथ कॉर्पोरेट गिफ्टिंग खर्च भी बढ़ रहा है, और कई कंपनियाँ अपने दिवाली गिफ्टिंग सूचियों को घटा रही हैं। इस प्रकार, इस दिवाली में उपहारों की बढ़ी हुई कीमतें उपभोक्ताओं के लिए अधिक खर्च का कारण बन सकती हैं।

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एमएसएमई ने ट्राइफेड के साथ MoU पर हस्ताक्षर, पीएम विश्वकर्मा कारीगरों के लिए बाजार पहुंच बढ़ेगी

एमएसएमई मंत्रालय ने पंजीकृत पात्र जनजातीय कारीगरों के लिए बाजार पहुंच को सुदृढ़ करने हेतु भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ (TRIFED) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर समारोह 5 नवंबर 2026 को PIB दिल्ली द्वारा प्रकाशित प्रेस विज्ञप्ति में दर्ज हुआ, जिसमें एमएसएमई के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश, ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक श्री एम. राजा मुरुगन, उप महानिदेशक श्री नितीश कुमार, एमएसएमई के संयुक्त विकास आयुक्त श्री दानिश अशरफ और ट्राइफेड के कार्यकारी निदेशक श्री प्रतीक सिंह मीणा उपस्थित थे। इस MoU के तहत ट्राइफेड के ट्राइब्स इंडिया मार्केटप्लेस और खुदरा नेटवर्क को एमएसएमई के पीएम विश्वकर्मा ढांचे के साथ जोड़कर पंजीकृत जनजातीय कारीगरों के पारंपरिक उत्पादों की बाजार दृश्यता बढ़ाई जाएगी। सहयोग के अंतर्गत कारीगरों के लिए उत्पाद प्रस्तुतिकरण, क्षमता निर्माण और व्यापक बाजार पहुंच का समर्थन किया जाएगा, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और पहुँच में सुधार होगा। पीएम विश्वकर्मा योजना, जिसे 17 सितंबर 2023 को शुरू किया गया, पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता तथा पहुंच में सुधार का उद्देश्य रखती है।

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धनतेरस के दिन सेंसेक्स 100 अंक टूटकर संभला, निफ्टी में हल्की गिरावट

धनतेरस के अवसर पर घरेलू शेयर बाजार ने शुरुआती सत्र में तीव्र उतार-चढ़ाव देखा। खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट की प्रवृत्ति स्पष्ट हुई। सेंसेक्स लगभग 100 अंकों की गिरावट के बाद पुनः स्थिर हो गया और 9:20 बजे 184.24 अंकों (0.23%) की बढ़त के साथ 79,494.25 पर कारोबार किया। वहीं निफ्टी 11.15 अंक (0.05%) गिरकर 24,525.45 पर समाप्त हुआ।

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सरकारी मान्यता प्राप्त स्क्रैप सेंटरों में पुरानी गाड़ी देने पर टैक्स छूट व सीडी लाभ

यदि आप धनतेरस पर नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी पुरानी गाड़ी को कबाड़ी के बजाय मान्यता प्राप्त स्क्रैप सेंटर में देना आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक हो सकता है। 26 अक्टूबर 2026 तक 23 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 176 पंजीकृत स्क्रैपिंग सेंटर सक्रिय हैं और कुल 7.14 लाख वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं, जिनमें 2.17 लाख निजी तथा 4.96 लाख सरकारी वाहन शामिल हैं। सरकारी वाहन स्क्रैपिंग का 1.80 लाख का लक्ष्य भी पूरा हो चुका है, और इनमें 6,462 बस, पुलिस वाहन और एंबुलेंस शामिल हैं। मान्यता प्राप्त सरकारी स्क्रैप सेंटर में वाहन देने पर मालिक को स्क्रैप कीमत के साथ जमा प्रमाणपत्र (सीडी) प्राप्त होता है। यह सीडी नई गाड़ी खरीदते समय विभिन्न वित्तीय राहतों के द्वार खोलता है: राज्य सरकार द्वारा रोड टैक्स में छूट, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट शुल्क की माफी और वाहन निर्माताओं की ओर से अतिरिक्त छूट। यदि नई गाड़ी तुरंत नहीं खरीदी जाती, तो सीडी को ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म पर बेचकर भी आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इन प्रावधानों के कारण निजी वाहन मालिकों की स्क्रैप सेंटरों में भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जिससे पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ वित्तीय बचत भी संभव हो रही है।

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