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कंचन कटकर: हुंपीरी की चांदी के घुंघरू की परंपरा

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

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कंचन कटकर, ७६ वर्षीया, हुंपीरी के एक अंधेरे घर में, दीपावली से लगभग एक महीने पहले, चांदी के घुंघरू चुनती हैं। वह लोहे के चिमटे से उन्हें पकड़ती हैं और चेन लूप से जोड़ती हैं। कटकर ने बताया कि यह काम वह दशकों से कर रही हैं और जब तक सक्षम होंगी, जारी रखेंगी।

कटकर 1970 में हुंपीरी की कुछ ही लड़कियों में से एक थीं जिन्होंने स्कूल पूरा किया। उस समय शादी को मानक माना जाता था, परंतु अपने दो बहनों के विवाह के बाद उन्होंने अपने माता-पिता की देखभाल के लिए अविवाहित रहने का निर्णय लिया। उनके माता-पिता भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेते थे।

कटकर की यह परंपरा हुंपीरी की सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा हिस्सा है, जो स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक त्योहारों के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: संविधान सभी कानूनों से ऊपर, त्वरित सुनवाई मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया कि संविधान सभी कानूनों और नियमों से ऊपर है। इस निर्णय में जस्टिस उज्जवल भुयान और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की बेंच ने यह दोहराया कि त्वरित सुनवाई (स्पीडी ट्रायल) का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जिसे किसी भी कानून के तहत उल्लंघन नहीं किया जा सकता और यह जमानत का आधार बन सकता है। बेंच ने विशेष रूप से एनडीपीएस, यूएपीए और पीएमएलए जैसे विशेष कानूनों के संदर्भ में कहा कि यदि इन कानूनों के प्रावधानों और संविधान के बीच कोई विरोधाभास या टकराव होता है, तो संविधान ही प्रभावी रहेगा। इसके अलावा, बेंच ने अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए अधिकारों को सिर्फ संवैधानिक नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार के रूप में परिभाषित किया और यह स्पष्ट किया कि संविधान की व्याख्या कानूनों के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान के आधार पर होनी चाहिए। यह निर्णय उन मामलों के बीच आया है जहाँ सुप्रीम कोर्ट के भीतर पीएमएलए, एनडीपीएस और यूएपीए मामलों में ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत के मुद्दे पर मतभेद थे। कुछ बेंचों ने त्वरित सुनवाई के अधिकार को जमानत का आधार नहीं मानने का रुख अपनाया था, जबकि अन्य ने इसके विपरीत रुख अपनाया था। इस निर्णय के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है, ताकि अंतिम निर्णय लिया जा सके।

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नवी मुंबई में दो युवतियों पर फायरिंग, दोनों गंभीर घायल; पुलिस ने मुख्य आरोपी गिरफ्तार

नवी मुंबई के कोपरखैरणे सेक्टर 1 के SS3 इलाके में गुरुवार रात लगभग 9:30 बजे एक घर के बाहर दो सहेलियों पर अज्ञात आरोपियों ने अंधाधुंध फायरिंग की। एक युवती के कान के पास और दूसरी सहेली की पीठ में गोली लगी, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान गिर पड़ीं। घायल युवतियों को तुरंत वाशी के नवी मुंबई महानगरपालिका अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने घटना के तुरंत बाद मुख्य आरोपी अर्जुन चव्हाण (22 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसका साथी राकेश चव्हाण फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। यह घटना महाराष्ट्र में त्योहारों के माहौल के बीच हुई, जिससे क्षेत्र में भय और चिंता बढ़ गई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने मुख्य आरोपी को पकड़ने में सफलता पाई, परन्तु अपराधी के साथी की गिरफ्तारी अभी बाकी है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मदद के लिए दौड़ लगाई, जिससे अस्पताल में तात्कालिक उपचार संभव हुआ।

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केरल हाई कोर्ट ने मर्सिडीज कार दुर्घटना में आरोपी जज को दी अग्रिम जमानत

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को अग्रिम जमानत प्रदान की, जिससे पुलिस की हिरासत में पूछताछ की मांग पर रोक लग गई। यह निर्णय उस मामले के संदर्भ में आया है जिसमें न्यायाधीश के नाबालिग बेटे पर 25 अक्टूबर को चेरानेल्लूर के पास एक स्कूटर सवार को टक्कर मारकर उसकी हत्या करने का आरोप है। घटना के दिन, तेज रफ्तार मर्सिडीज‑बेंज कार ने 54 वर्षीय व्यक्ति के दो‑पहिया वाहन को टक्कर मार दी, जिससे वह क्षतिग्रस्त होकर मृत्यु को प्राप्त हो गया। अभियोजन पक्ष का दावा है कि उस समय कार जज के नाबालिग बेटे द्वारा चलाई जा रही थी। इस घटना के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। सुनवाई के दौरान जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने राज्य सरकार और पुलिस से कई प्रश्न उठाए, विशेषकर इस बात पर कि जांच अधिकारी ने जज के घर की तलाशी ले ली है और आवश्यक सामान जब्त कर लिया है, फिर भी गिरफ्तारी की मांग क्यों की जा रही है। उन्होंने पुलिस की कस्टडी की मांग पर भी संदेह व्यक्त किया और यह संकेत दिया कि यदि सभी आरोप सही हैं तो भी गिरफ्तारियों की आवश्यकता क्यों है। कोर्ट ने इन सब प्रश्नों के बाद आरोपी न्यायाधीश को अग्रिम जमानत प्रदान की, जिससे पुलिस को अब तुरंत हिरासत में ले कर पूछताछ करने की अनुमति नहीं होगी। यह निर्णय सार्वजनिक चर्चा में लाया गया है, क्योंकि यह मामला न्यायिक पदस्थ व्यक्तियों की व्यक्तिगत कारवाइयों को सार्वजनिक न्याय प्रणाली में लाने के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। अग्रिम जमानत के बाद, मामले की आगे की कार्यवाही में जांच एजेंसियों को साक्ष्य एकत्र करने और संभावित अन्य आरोपों की पुष्टि करने की अनुमति होगी, जबकि आरोपी न्यायाधीश को न्यायालय के आदेशों के तहत सहयोग जारी रखना होगा।

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तमिलनाडु के गवर्नर अर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से नई दिल्ली में मुलाकात की

तमिलनाडु के पूर्णकालिक गवर्नर राजेंद्र विष्णु अर्लेकर ने 5 नवंबर 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। यह उनका पहला ऐसा मिलन है, क्योंकि उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को पदभार संभाला था। अर्लेकर पूर्व में केरल के गवर्नर थे।

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