खनन मंत्रियों का चौथा सम्मेलन 5‑6 नवंबर 2026 को गोवा में
प्रकाशित: (फ़ीड में तिथि नहीं थी — यह प्राप्त होने का समय है)
भारत सरकार का खान मंत्रालय 5‑6 नवंबर 2026 को गोवा में खनन मंत्रियों के चौथे सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के खनन मंत्री तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
सम्मेलन का उद्देश्य खनन क्षेत्र के विकास, अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा करना तथा राज्यों के अनुभवों, पहलों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना है। यह मंच राज्य के खान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे आपसी संवाद और सहयोग को मजबूती मिलेगी।
खान मंत्रालय इस सम्मेलन के माध्यम से खनन क्षेत्र की सामूहिक उन्नति और विकसित भारत के विजन में इसके योगदान को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ निरंतर जुड़ाव को दर्शा रहा है।
यह खबर क्यों अहम है
देश स्तर का यह घटनाक्रम आम नागरिकों, राज्यों और नीतियों पर असर डाल सकता है।
प्रतियोगी परीक्षा के नज़रिए से
- खनन मंत्रियों का चौथा सम्मेलन 5‑6 नवंबर 2026 को गोवा में आयोजित
- सम्मेलन में राज्यों के खनन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे
परीक्षा की दृष्टि से
विषय: राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम
उपयोगी परीक्षाएं: UPSC, SSC, रक्षा (CDS/NDA), राज्य PCS
यह आधिकारिक स्रोत की सूचना है — योजना/निर्णय का नाम, मंत्रालय, तारीख और प्रमुख आंकड़े नोट करें।
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आईआईसीए और आईएएमसी ने वैकल्पिक विवाद समाधान के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर (आईएएमसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह सहयोग विशेष क्षमता निर्माण, MSME मध्यस्थता सहायता, नीति दिशा में अनुसंधान और भारत@2047 के लक्ष्यों के अनुरूप ADR ढांचे को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। समझौते के दौरान, आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने श्री ए. जे. जवाद, सीईओ एवं रजिस्ट्रार आईएएमसी का स्वागत किया। श्री कर्नल अमनदीप सिंह पुरी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तथा श्री जवाद ने मिलकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए। वैकल्पिक विवाद समाधान उत्कृष्टता केंद्र (सीईएडीआर) के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. नवीन सिरोही ने गणमान्यों का स्वागत करते हुए साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। साक्षात्कार में श्री सिंह ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक पाठ्यक्रम, कार्यशालाएँ और सेमिनार के माध्यम से मध्यस्थों और विवाद समाधान पेशेवरों के एक विशेष समूह के निर्माण पर बल दिया। उन्होंने MSME क्षेत्र में मध्यस्थता के महत्व को रेखांकित किया, यह बताते हुए कि यह क्षेत्र आर्थिक विकास, जीडीपी और निर्यात में योगदान देता है। श्री जवाद ने बताया कि आईएएमसी आईआईसीए के साथ मिलकर संरचित कार्यक्रम, संयुक्त पहल और नीति-उन्मुख अनुसंधान विकसित करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ाने, सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रोत्साहित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है। समारोह का आयोजन वैकल्पिक विवाद समाधान उत्कृष्टता केंद्र की ओर से वित्त एवं प्रबंधन स्कूल के सहयोग से किया गया। इस समझौते के तहत दोनों संस्थाएँ मध्यस्थता, सुलह और विवाद समाधान प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाएँगी, जिससे भारत में ADR तंत्र को सुदृढ़ किया जा सकेगा।
