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सेहत

कैंसर‑रोधी दवाओं की संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू, उपभोक्ताओं को वार्षिक 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की बचत

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

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औषधि विभाग ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) द्वारा निर्धारित 137 कैंसर‑रोधी दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में संशोधन 9 नवंबर 2026 से लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा 17 अक्टूबर 2026 को गठित विशेषज्ञ समिति की सिफ़ारिशों पर आधारित है।

अब तक 76 दवा कंपनियों ने 121 दवाओं के अंतर्गत 1,225 फॉर्मूलेशन की संशोधित एमआरपी जानकारी प्रस्तुत की है, जिसमें 1,031 फॉर्मूलेशन की कीमतों में कमी दर्ज हुई है। 600 से अधिक ब्रांडों की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि अधिकतम कमी 96.45 प्रतिशत तक रही। इस मूल्य‑कटौती से उपभोक्ताओं को वार्षिक लगभग 3,502.31 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।

एनपीपीए ने अधिसूचना एसओ 5690 (ई) दिनांक 17 अक्टूबर 2026 के तहत व्यापार‑मार्जिन की सीमा निर्धारित की है, जबकि निर्माता औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के पैराग्राफ 20(1) के अनुसार वार्षिक मूल्य‑वृद्धि का लाभ 30 प्रतिशत तक के अधिकतम व्यापार‑मार्जिन के अधीन रहेगा। प्रत्येक खुदरा विक्रेता, डीलर, अस्पताल और संस्थान को अपनी वेबसाइट और परिसरों में संशोधित एमआरपी सूची को प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य है; राज्य औषधि नियंत्रक निर्माताओं, डीलरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों द्वारा अनुपालन की निगरानी करेंगे।

उपभोक्ता फार्मा सही दाम मोबाइल एप्लिकेशन और एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट (www.nppa.gov.in) के माध्यम से लागू कीमतों की जाँच कर सकते हैं और किसी भी गैर‑अनुपालन की रिपोर्ट कर सकते हैं। इस पहल से कैंसर‑रोधी दवाओं की पहुँच में सुधार और कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

यह खबर क्यों अहम है

सेहत से जुड़ी जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है; किसी भी इलाज या दवा से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

प्रतियोगी परीक्षा के नज़रिए से

  • राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 137 कैंसर‑रोधी दवाओं के एमआरपी पर व्यापार‑मार्जिन सीमा निर्धारित की, लागू तिथि 9 नवंबर 2026।
  • उपभोक्ताओं को वार्षिक अनुमानित बचत लगभग 3,502.31 करोड़ रुपये होगी।
  • दवा कंपनियों ने 121 दवाओं के 1,225 फॉर्मूलेशन की संशोधित कीमतें प्रस्तुत कीं, जिनमें 1,031 फॉर्मूलेशन की कीमतें घटाई गईं।
  • निर्माता औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के पैराग्राफ 20(1) के तहत वार्षिक मूल्य‑वृद्धि 30 प्रतिशत तक के व्यापार‑मार्जिन के अधीन है।

परीक्षा की दृष्टि से

उपयोगी परीक्षाएं: UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, राज्य PCS

यह आधिकारिक स्रोत की सूचना है — योजना/निर्णय का नाम, मंत्रालय, तारीख और प्रमुख आंकड़े नोट करें।

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जहांगीर ने अहमदाबाद को 'गर्दाबाद' और 'जहन्नुमाबाद' कहा, कारण असहनीय गर्मी और बीमारी

17वीं सदी में मुग़ल बादशाह जहांगीर का अहमदाबाद में प्रवास हुआ। वहाँ की अत्यधिक गर्मी, धूल भरा वातावरण और फैली हुई बीमारी से वे अत्यंत असंतुष्ट थे। इस असुविधा के कारण उन्होंने शहर को 'गर्दाबाद' और 'जहन्नुमाबाद' जैसे नकारात्मक नाम दिए। इन नामों से यह स्पष्ट होता है कि जहांगीर का अनुभव अहमदाबाद के जलवायु और स्वास्थ्य स्थितियों से गहरा प्रभावित था, जिससे उन्होंने अपनी नकारात्मक भावनाएँ व्यक्त कीं।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

प्रधानमंत्री ने आयुर्वेद व निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर लेख साझा किया

प्रधानमंत्री कार्यालय ने 06 नवंबर 2026 को दिल्ली से एक प्रविष्टि जारी की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनतेरस के अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा लिखित एक लेख को साझा किया। इस लेख में आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य संरक्षण और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व को रेखांकित किया गया है। लेख में परिवारों को स्वस्थ जीवन‑शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है। विशेष रूप से संतुलित एवं सोच‑समझकर भोजन, नियमित योग, पर्याप्त नींद और समय‑समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी गई है। यह संदेश आयुर्वेद की सिद्धांतों पर आधारित है, जो रोगों से बचाव और समग्र कल्याण पर बल देता है। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि आयुर्वेद स्वास्थ्य के संरक्षण पर विशेष जोर देता है और निवारक देखभाल क्यों आवश्यक है। उन्होंने परिवारों को इन स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे व्यक्तिगत और सामूहिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार हो सके। यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आयुर्वेद को निवारक देखभाल के प्रमुख साधन के रूप में प्रस्तुत करने का उद्देश्य रखती है। लेख में कहा गया है कि अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य में निवेश करना और स्वस्थ भविष्य का निर्माण करना सामाजिक कल्याण के लिए आवश्यक है।

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कैंसर दवाओं पर व्यापार मार्जिन 30% तक सीमित, 137 दवाओं में औसत 20%‑70% कटौती

कैंसर की सस्ती दवाओं पर व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30% तक सीमित करने का आदेश 17 अक्टूबर, 2026 को राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) द्वारा जारी किया गया। यह निर्णय 137 गैर‑अनुसूचित एंटी‑कैंसर दवाओं पर लागू होता है, जिनमें पेटेंट प्राप्त दवाएँ भी शामिल हैं। संशोधित मूल्य 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होंगे। इस आदेश के तहत, 4 नवंबर, 2026 तक 70 कंपनियों ने 120 दवाओं के लिए संशोधित एमआरपी घोषित कर दिए। सबसे अधिक 96.45% की कमी के साथ कुल अनुमानित बचत 3,357.49 करोड़ रुपये के रूप में दर्ज की गई। औसतन, एमआरपी में 20% से 70% तक की कटौती हुई है। व्यापार मार्जिन, जो निर्माता से वितरक तक ली जाने वाली कीमत और रोगी द्वारा भुगतान की जाने वाली अधिकतम कीमत के बीच का अंतर है, पर यह सीमा लगाने से आपूर्ति श्रृंखला में मुनाफे को नियंत्रित किया गया है। किसी दवा का नया अधिकतम खुदरा मूल्य मार्च 2026 के औसत वितरक मूल्य से निर्धारित किया गया है, और उस पर 30% से अधिक व्यापार मार्जिन नहीं हो सकता। इस पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भी लागू होगा। यह कदम सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप है, जिसमें हर परिवार को किफायती और गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध कराना शामिल है। राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (एनएलईएम) के तहत, 2022 में जारी नवीनतम संस्करण को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 13 सितंबर, 2022 को जारी किया था। एनएलईएम को 1996 से लेकर 2022 तक कई बार अपडेट किया गया है, और इसे स्टैंडिंग नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन्स (एसएनसीएम) द्वारा तैयार किया गया था। साथ ही, सरकार दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में टेलीकंसल्टेशन सेवाओं के लिए ई‑संजीवनी प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कर रही है, जिसमें कैंसर उपचार भी शामिल है। यह पहल किफायती दवाओं के साथ-साथ पहुँच को भी बेहतर बनाने का उद्देश्य रखती है।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद ने कॉर्निया प्रत्यारोपण का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद ने सफलतापूर्वक कॉर्निया प्रत्यारोपण का ऑपरेशन किया। इस प्रक्रिया में रोगी को नया कॉर्निया स्थापित किया गया, जिससे दृष्टि सुधार की संभावना बनी।

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