मुख्य सामग्री पर जाएं
ताज़ा
सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी अदालत के तलाक को भारत में अमान्य करार दिया, डॉक्टर की याचिका खारिजसंसद मानसून सत्र का सत्रावसान 82 दिन बाद न होने पर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाएजेलों में जातिगत भेदभाव पर राज्यों की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगीभाजपा ने कांग्रेस‑सहयोगियों पर मतदाता सूची पुनरीक्षण और अराजकता मॉडल जारी रखने का हमलाNHAI के मास्टर प्लान से बिहार बाढ़ मुक्त, राज्य को कोई खर्च नहींक्यूएस एशिया रैंकिंग में भारतीय आईआईटी और आईआईएससी शीर्ष‑100 में रहे, रैंकिंग में गिरावटसुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सभी राज्यों में डीजीपी नियुक्ति के नियमों का सार प्रस्तुत करने का निर्देश दियाटाटा मोटर्स तैयार कर रहा है कूपे‑एसयूवी Curvv का CNG संस्करणUP में जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के 1,156 पदों के लिए आज से ऑनलाइन आवेदन, फीस 25 रुपयेदिल्ली‑नोएडा‑गाजियाबाद से पूर्वांचल के लिए यूपी रोडवेज की स्पेशल बस सेवा शुरूशाहरुख खान की ‘किंग’ का गाना ‘तू मिल जाए’ 24 घंटे में सबसे अधिक देखा गया भारतीय फिल्मी गानामधुबनी के बाबूबरही में गोलीकांड पर ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं ने DM आनंद शर्मा का कॉलर पकड़ा
देश

ओमप्रकाश राजभर ने 'हम उनसे बड़े गुंडा' बयान पर कहा‑कोई गलती नहीं

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

प्रकाशित:

WhatsApp

यूपी के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने हाल ही में अपने 'हम उनसे बड़े गुंडा हैं' वाले बयान को लेकर उठे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है और यह बयान उनके द्वारा उन इलाकों में लोगों का हौसला बढ़ाने के उद्देश्य से कहा गया था जहाँ दबंग और गुंडे गरीबों तथा कमजोर वर्ग को डराते हैं।

राजभर ने स्पष्ट किया कि ऐसी भाषा का प्रयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ सशक्तिकरण की आवश्यकता है, ताकि स्थानीय जनता को डराने वाले तत्वों के सामने उनका आत्मविश्वास बढ़े। उन्होंने यह भी कहा कि उनका इरादा किसी को अपमानित करना नहीं था, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की भावना को प्रोत्साहित करना था।

यह खबर क्यों अहम है

देश स्तर का यह घटनाक्रम आम नागरिकों, राज्यों और नीतियों पर असर डाल सकता है।

परीक्षा की दृष्टि से

विषय: राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम

उपयोगी परीक्षाएं: UPSC, SSC, रक्षा (CDS/NDA), राज्य PCS

नाम, तारीख, स्थान और आंकड़े नोट करें और संभव हो तो आधिकारिक स्रोत (PIB/मंत्रालय) से मिलान करें।

विषय-टैग शीर्षक के शब्दों के आधार पर अपने-आप लगाए गए हैं।

इस खबर को शेयर करें

WhatsApp

सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी अदालत के तलाक को भारत में अमान्य करार दिया, डॉक्टर की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि विवाह के अपूरणीय रूप से टूटने के आधार पर विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक भारत में वैध नहीं माना जाएगा। इस दिशा‑निर्देश के तहत ब्रिटेन की अदालत से तलाक लेने वाले डॉक्टर की याचिका को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि विदेशी न्यायालयों के निर्णयों को भारतीय वैवाहिक कानून के तहत मान्यता नहीं मिल सकती जब तक वे भारतीय विधि के अनुरूप न हों। यह निर्णय भविष्य में समान मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

जेलों में जातिगत भेदभाव पर राज्यों की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जातिगत भेदभाव और अमानवीय प्रथाओं के संबंध में 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रतिक्रिया न मिलने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकारों की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है और यह न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। न्यायालय ने राज्यों से तत्काल जवाब देने और सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया। इस टिप्पणी से न्यायिक निगरानी में राज्य सरकारों की जवाबदेही पर प्रकाश पड़ा।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

NHAI के मास्टर प्लान से बिहार बाढ़ मुक्त, राज्य को कोई खर्च नहीं

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मास्टर प्लान के तहत बिहार में बाढ़ मुक्त क्षेत्र बनाना लक्ष्य है, जिसमें राज्य सरकार को कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार के राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह योजना नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाकर बाढ़ नियंत्रण में मदद करेगी। योजना के कार्यान्वयन से जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और राज्य के समग्र विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

क्यूएस एशिया रैंकिंग में भारतीय आईआईटी और आईआईएससी शीर्ष‑100 में रहे, रैंकिंग में गिरावट

नवीनतम क्यूएस एशिया रैंकिंग में भारतीय संस्थानों ने शीर्ष 100 में अपनी जगह बरकरार रखी। इस सूची में प्रमुख रूप से आईआईटी और आईआईएससी शामिल हैं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले अपनी रैंक में गिरावट दर्ज कराते हैं। रैंकिंग में गिरावट के बावजूद, इन संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता को जारी माना गया है। इस परिणाम से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों ने शीर्ष‑सतह पर अपनी उपस्थिति बनाए रखी है, परन्तु प्रतिस्पर्धी सुधार की आवश्यकता भी उजागर हुई है।

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क