केरल हाईकोर्ट ने कहा: धरना‑भूख हड़ताल का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं, छात्र निकाले जा सकते हैं
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केरल हाईकोर्ट ने अपने हालिया टिप्पणी में स्पष्ट किया कि धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसी विधियों का भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। कोर्ट ने यह बयान कालडी स्थित श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय में 16 निलंबित छात्रों के मामले के संदर्भ में दिया।
न्यायालय ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान का मुख्य उद्देश्य पढ़ाई है, न कि राजनीतिक मंच। यदि छात्र किसी आंदोलन में भाग लेते हैं तो उन्हें संस्थान से निष्कासित किया जा सकता है। इस दिशा-निर्देश से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित रखने की कोशिश को दर्शाया गया है।
कोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक प्रदर्शन को सीमित किया जा सकता है, जबकि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अन्य मंचों का उपयोग किया जाना चाहिए।
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