डार्लीन ग्राहम ने दक्षिण कैरोलिना सीनेट सीट के लिए चुनाव हारते हुए ट्रम्प के 28‑साल के कब्जे को तोड़ा
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रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लीन ग्राहम ने दक्षिण कैरोलिना सीनेट सीट के लिए चुनाव में हार का सामना किया। वह अपने दिवंगत भाई लिंडसे ग्राहम की जगह लेने की कोशिश कर रही थीं, जिनका निधन हो गया था।
यह सीट पिछले 28 वर्षों से रिपब्लिकन पार्टी के साथ थी, लेकिन इस बार ट्रम्प के समर्थकों की असंतुष्टि और सहानुभूति वोट की कमी के कारण यह बदल गई।
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राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले फैसलों, चुनावी समीकरण और शासन की दिशा को समझने में मदद करता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा जनसांख्यिकीय बदलाव नज़रअंदाज़ करने से भविष्य में गंभीर परिणाम हो सकते
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह चेतावनी दी कि यदि भारत में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानूनों को बदलती जनसांख्यिकीय परिस्थितियों के अनुसार संशोधित नहीं किया गया तो देश को भविष्य में गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इस निर्णय में जनसंख्या वृद्धि और सामाजिक संरचना में बदलाव को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कोर्ट के इस फैसले से महाराष्ट्र के पूर्व सरपंच को राहत मिली, जिन्हें इस मुद्दे से जुड़ी कानूनी जाँच का सामना करना पड़ रहा था। बेंच ने कहा कि मौजूदा प्रावधानों की प्रासंगिकता का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में समानता और न्याय सुनिश्चित हो सके।
CJI ने कहा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटे तो घबराएँ नहीं, मामला सुन रहे हैं
दिल्ली में SIR (सुपर इंटेग्रेटेड रजिस्ट्रेशन) के बाद जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं दिखे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि 2026 की वोटर लिस्ट में शामिल लोग SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए हैं और अब उन्हें नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की बाध्यता नहीं है। वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते स्पष्ट किया था कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को प्रभावित व्यक्तियों को पुनः पंजीकरण के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। इस संदर्भ में एक दिन पहले चुनाव आयोग ने संबंधित व्यक्तियों को फॉर्म‑6 भरने का निर्देश दिया था, जिससे यह स्पष्ट हो कि प्रक्रिया अभी भी चल रही है। विचाराधीन याचिका का मुख्य बिंदु यह है कि ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने के कारण मतदाता अधिकारों पर संभावित प्रभाव को लेकर न्यायालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। कोर्ट की सुनवाई के बाद इस मुद्दे पर आगे की कार्यवाही तय होगी।
दिल्ली SIR में फॉर्म‑6 पर अड़ा चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दिवाली‑छुट्टियों के बाद सुनवाई
दिल्ली के सिविल इन्फॉर्मेशन रजिस्टर (SIR) में हटाए गए मतदाताओं को फॉर्म‑6 भरवाने के आदेश पर चुनाव आयोग ने विरोध किया है। इस विवाद को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिससे न्यायिक समीक्षा का मार्ग खुला। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बताया कि इस याचिका की सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद निर्धारित की जाएगी। इस घोषणा से यह स्पष्ट हुआ कि अदालत इस मुद्दे को तुरंत नहीं सुनाएगी, बल्कि छुट्टियों के बाद ही मामले की गहराई से जांच करेगी। फॉर्म‑6 के संबंध में चुनाव आयोग का विरोध इस बात को उजागर करता है कि हटाए गए मतदाताओं की सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में procedural कठिनाइयाँ और वैधता संबंधी प्रश्न उठ रहे हैं। अदालत की आगामी सुनवाई के बाद इस विवाद का समाधान निकलेगा, जिससे SIR में मतदाता डेटा की शुद्धता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर असर पड़ेगा।
चुनाव आयोग के फॉर्म‑6 आदेश पर याचिका, सीजेआई ने मतदाताओं को आश्वस्त किया
चुनाव आयोग ने कुछ मतदाताओं को फॉर्म‑6 भरने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। फॉर्म‑6 वह आवेदन है जिसके द्वारा मतदाता सूची में अपना नाम जोड़वाया जा सकता है। याचिका में कहा गया कि कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं और उन्हें इस आदेश से असुविधा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मामला अदालत में चल रहा है और उचित समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट इस मुद्दे की पूरी तरह से जांच कर रहे हैं। वर्तमान में इस याचिका की सुनवाई जारी है और मामले की प्रगति के अनुसार आगे की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
