सरकार ने दवा बैच जारी करने में विशेषज्ञ की मंजूरी अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा
प्रकाशित:
स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा निर्माताओं के लिए एक नया नियमन प्रस्तावित किया है, जिसके तहत प्रत्येक दवा बैच को जारी करने से पहले योग्य और अनुभवी व्यक्ति की मंजूरी अनिवार्य होगी। इस प्रस्ताव के अनुसार, निर्माताओं को प्रत्येक बैच का विस्तृत रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य किया गया है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया की पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित हो सके।
प्रस्तावित नियम का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुदृढ़ करना है, ताकि उपभोक्ताओं को असुरक्षित या घटिया उत्पादों का सामना न करना पड़े। मंत्रालय ने कहा कि इस दिशा में कदम उठाकर दवा उद्योग में भरोसा बढ़ेगा और संभावित दुरुपयोग या गुणवत्ता में गिरावट को रोका जा सकेगा।
यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप ले लेता है, तो दवा कंपनियों को अपने उत्पादन प्रक्रियाओं में अतिरिक्त मानक अपनाने होंगे, जिसमें विशेषज्ञ की नियुक्ति और विस्तृत दस्तावेजीकरण शामिल होगा। इससे नियामक निरीक्षण आसान होगा और दवा की विश्वसनीयता में सुधार की उम्मीद है।
यह खबर क्यों अहम है
देश स्तर का यह घटनाक्रम आम नागरिकों, राज्यों और नीतियों पर असर डाल सकता है।
परीक्षा की दृष्टि से
विषय: महत्वपूर्ण नियुक्तियां · राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम
उपयोगी परीक्षाएं: SSC, बैंकिंग, रेलवे, राज्य PCS, UPSC, रक्षा (CDS/NDA)
नाम, तारीख, स्थान और आंकड़े नोट करें और संभव हो तो आधिकारिक स्रोत (PIB/मंत्रालय) से मिलान करें।
विषय-टैग शीर्षक के शब्दों के आधार पर अपने-आप लगाए गए हैं।
इस खबर को शेयर करें
संबंधित खबरें
कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट‑चाइना टाउन तक सूरत बदलने के लिए एनबीसीसी के साथ नौ परियोजनाओं का करार
शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग ने नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) के साथ नौ शहरी परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन परियोजनाओं के तहत कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट से चाइना टाउन तक सूरत (सड़कों) का पुनर्विकास किया जाएगा। समझौते में उल्लेखित कार्यों में सड़कों का विस्तृत पुनर्निर्माण, फुटपाथों का सुधार, जल निकासी प्रणाली का आधुनिकीकरण और सार्वजनिक स्थानों का सुसज्जन शामिल है। यह पहल शहरी निकायों और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से की जा रही है, जिससे स्थानीय बुनियादी ढाँचे में सुधार और नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में वृद्धि की उम्मीद है। एनबीसीसी के साथ इस समझौते से परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विशेषज्ञता और वित्तीय समर्थन सुनिश्चित होगा, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण होने की संभावना बढ़ेगी।
खातेगांव कांड में एसआईटी पर फायरिंग कर भागे ड्राइवर गजेंद्र का शॉर्ट एनकाउंटर, पैर में लगी गोली
खातेगांव में हुई टीआई दिलीप पुरी को ट्रक से कुचलने की घटना की जांच कर रही एसआईटी ने मुख्य आरोपित ड्राइवर गजेंद्र रावत उर्फ अक्कू को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद गजेंद्र ने एसआईटी पर फायरिंग कर भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर कर दिया। इस मुठभेड़ में गजेंद्र के पैर में गोली लगी। घटना से संबंधित आगे की जांच जारी है।
मध्य प्रदेश के हरदा में काले हिरण का शिकार, खेत में शव छोड़ भागे शिकारी
ग्रामीणों के अनुसार, फसल कटने के बाद हरदा के खेत खाली हो गए हैं और रात में काले हिरण व अन्य वन्यजीव इन खुले मैदानों में विचरण करते हैं। शिकारियों ने इन जानवरों को आसान निशाना बना लिया, जिससे कई काले हिरण मारे गए और उनके शव खेत में छोड़कर भाग गए। वन परिक्षेत्र अधिकारी सीएस भिलाला ने बताया कि शिकार को रोकने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान में वन्यजीवों की सुरक्षा, शिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और स्थानीय किसानों को जागरूक करने के उपाय शामिल हैं।
122 जिलों में महिला मृत्यु पंजीकरण 40% से कम, देश भर में 30% मौतें सरकारी रिकॉर्ड से बाहर
WHO के एक विश्लेषण में देश भर की 84,390 मौतों का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन से पता चला कि 707 जिलों में से 122 जिलों में महिलाओं की मृत्यु पंजीकरण दर 40 प्रतिशत से भी कम रही। विशेष रूप से बिहार में 38 जिलों में से 37 जिलों में महिलाओं की मौतों का पंजीकरण 60 प्रतिशत से कम था। झारखंड में भी समान स्थिति देखी गई, जहाँ कई जिलों में पंजीकरण दर इस सीमा से नीचे रही। अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे में तो केवल 5 प्रतिशत ही महिला मौतें दर्ज हुईं, जिससे डेटा की कमी स्पष्ट होती है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि देश के लगभग एक तिहाई मौतों का डेटा आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों और योजना निर्माण में गंभीर अंतर पैदा हो रहा है।
