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दवाओं‑मेडिकल उपकरणों के आयात के लिए 6 राज्यों में एंट्री पॉइंट प्रस्तावित

दैनिक आयाम न्यूज़ डेस्क

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों के आयात को सुगम बनाने हेतु अधिकृत प्रवेश केंद्रों का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत छह राज्यों में नए एंट्री पॉइंट स्थापित किए जाएंगे, जिससे आयात प्रक्रिया में गति आएगी और नियामक नियंत्रण मजबूत होगा।

प्रस्तावित एंट्री पॉइंटों से आयातकों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने की सुविधा मिलेगी, जिससे समय और लागत दोनों में कमी की उम्मीद है।

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हिंद-प्रशांत संवाद में नौसेना प्रमुख ने समुद्री सुरक्षा के कारकों की सामूहिक समझ बढ़ाने की पैरवी की

हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (IPRD) के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों की समझ को गहरा करने और क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह बयान नई दिल्ली में आयोजित सत्र में बुधवार को दिया गया। एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य तेज प्रतिस्पर्धा, बदलते शक्ति‑समीकरण, बड़े तकनीकी बदलाव और परस्पर प्रतिस्पर्धी रणनीतिक हितों के दौर से गुजर रहा है, और समुद्री क्षेत्र इन प्रवृत्तियों के केंद्र में स्थित है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जिनकी सामूहिक समझ बढ़ाने से ही प्रभावी सहयोग संभव होगा। वक्ता ने उल्लेख किया कि नवंबर 2019 में बैंकाक में आयोजित 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंद‑प्रशांत महासागर पहल (IPOI) की घोषणा की थी। इस पहल ने सात स्तंभों के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग का ढांचा प्रस्तुत किया। IPRD 2026 का विषय‑विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग इन स्तंभों में से एक से सीधे जुड़ा है, जिससे संवाद का महत्व स्पष्ट होता है। एडमिरल ने यह भी बताया कि हिंद‑प्रशांत शब्द की रणनीतिक अवधारणा से पहले ही प्रकृति ने दोनों महासागरों को सतह के नीचे जलधाराओं और सतह के ऊपर जलवायु के माध्यम से आपस में जोड़ दिया था। इंडोनेशियाई द्वीपसमूह से होकर समुद्री धाराएँ हर सेकंड लगभग 1.5 करोड़ घन मीटर पानी प्रशांत महासागर से हिंद महासागर में ले जाती हैं, जो इस प्राकृतिक जुड़ाव का प्रमाण है। संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित थे और उन्होंने IPRD 2026 के एक सत्र में भाग लिया। एडमिरल ने साझा हितों को व्यावहारिक परिणामों में बदलने, दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं को सुदृढ़ करने और IPRD 2026 को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण, यद्यपि छोटी, भूमिका निभाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

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बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन की कंपनियों को पांच साल में मिले 150 टेंडर, करोड़ों की लेनदेन जांच के दायरे में

बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन की कंपनियों को पिछले पाँच वर्षों में लगभग 150 टेंडर मिले, इसका पता कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने लगाया है। टेंडर पर्यटन विभाग द्वारा विभिन्न समय पर जारी किए गए थे, परन्तु बार‑बार वही तीन कंपनियों को ही ठेके आवंटित किए गए। एसआईटी ने बताया कि इन टेंडरों में दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर में प्रसाद वितरण, रेड रोड कार्निवल, सड़कों की सजावट, बैनर लगाना, विभिन्न स्थानों पर मिठाई वितरण और अभिनेता अमिताभ बच्चन के जन्मतिथि समारोह का आयोजन जैसे कार्य शामिल थे। विभाग ने इन कार्यों के लिये अलग‑अलग टेंडर जारी किए, परंतु सभी ठेके इंद्रनील सेन से जुड़ी तीन कंपनियों को ही प्रदान किए गए। जांच के अनुसार, इंद्रनील सेन की पत्नी और बेटी के बैंक खातों में इन कंपनियों से करोड़ों रुपये जमा हुए, जिन्हें बाद में फिर से कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस ने इन लेनदेन की कड़ियों को जोड़ते हुए कहा कि कंपनियों के संचालकों का इंद्रनील सेन से करीबी संबंध था और वे उनके नियंत्रण में थे। इस संदर्भ में उनकी पत्नी से दोबारा पूछताछ की संभावना जताई गई है, जबकि इंद्रनील ने कहा कि उनकी पत्नी को गड़बड़ी की जानकारी है, परन्तु उन्हें स्वयं इसकी जानकारी नहीं है। यह जांच दुर्गा पूजा पास बिक्री में घोटाले की जांच के बाद पर्यटन विभाग के ठेकों में वित्तीय अनियमितताओं की ओर बढ़ी है। विशेष जांच टीम ने टेंडर आवंटन, सरकारी भुगतान और कंपनियों के बैंक खातों के लेनदेन का विस्तृत हिसाब जुटाने का कार्य जारी रखा है। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो इंद्रनील सेन और उनके परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही, इस प्रकार के टेंडर आवंटन में पारदर्शिता की कमी से सार्वजनिक निधियों के दुरुपयोग की आशंका उत्पन्न होती है, जिससे भविष्य में सरकारी अनुबंधों में कड़ाई से निगरानी और नियमन की मांग बढ़ेगी।

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कोलकाता में दुर्गा पूजा पास मामले में मासआर्ट के सचिव ध्रुवज्योति बोस गिरफ्तार

कोलकाता पुलिस ने बुधवार शाम लगभग 7:15 बजे तिरहट्टी बाजार क्षेत्र से मासआर्ट के सचिव ध्रुवज्योति बोस, जिन्हें शुभो के नाम से भी जाना जाता है, को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई दुर्गा पूजा प्रीव्यू शो और विशेष प्रवेश पास बेचने से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच के हिस्से के रूप में की गई। ध्रुवज्योति बोस को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस ने इस मामले में उनकी भूमिका और कथित लेनदेन के बारे में पूछताछ शुरू की। जांच के अनुसार, यूनेस्को द्वारा दुर्गा पूजा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मान्यता मिलने के बाद 2022 से 2025 के बीच मासआर्ट ने प्रीव्यू शो और विशेष प्रवेश पास बेचने की व्यवस्था की थी। आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से 24 चयनित पूजा पंडालों में प्रवेश के नाम पर आम जनता से बड़ी रकम वसूली गई। पुलिस के अनुसार, इस वित्तीय हेराफेरी में लगभग 20 बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के लेनदेन हुए हैं। इन खातों, संबंधित कंपनियों और परिवार के सदस्यों के बीच लेनदेन की कड़ियां जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। इस संदर्भ में, जून 2026 में बहुबाजार थाने में दर्ज की गई एफआईआर में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी मधुच्छंदा सेन और मासआर्ट के अन्य पदाधिकारियों के नाम भी शामिल थे। इंद्रनील सेन को 28 अक्टूबर को ईडी कार्यालय में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर बैंकशाल अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें 10 नवंबर तक हिरासत में रखने का आदेश मिला। पुलिस ने यूनेस्को से भी इस मामले में जानकारी मांगी है। यूनेस्को ने राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग के साथ आधिकारिक संवाद होने की बात स्वीकार की, परन्तु किसी संस्था या विभाग के साथ व्यावसायिक उपयोग के लिए समझौता न होने की पुष्टि की। इस तथ्य से यह स्पष्ट होता है कि यूनेस्को का नाम केवल प्रचारात्मक रूप से इस्तेमाल किया गया, जबकि वास्तविक व्यावसायिक समझौता नहीं हुआ। जांच में प्रीव्यू शो के पास बिक्री, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित कंपनियों को किए गए भुगतान की भी विस्तृत जांच चल रही है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इस वित्तीय धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप कई व्यक्तियों को आपराधिक दायित्व का सामना करना पड़ेगा और सार्वजनिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए नियामक उपायों की आवश्यकता होगी।

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NHRC ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशकों को नाबालिग लड़कियों की तस्करी पर नोटिस जारी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मंगलवार को मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारों तथा उनके पुलिस प्रमुखों को नाबालिग लड़कियों की खरीद‑फरोख्त से संबंधित मामलों में नोटिस भेजा। यह कार्रवाई उन मीडिया रिपोर्टों के बाद की गई है, जिनमें कहा गया है कि इन राज्यों के सीमावर्ती जिलों में कुछ माता‑पिता अपनी नाबालिग बेटियों को बिचौलियों को तीन से पाँच लाख रुपये में बेच रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बिचौलिए फर्जी दस्तावेज़ों की सहायता से इन लड़कियों की पहचान बदलते हैं और उन्हें महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में 35‑40 लाख रुपये की कीमत पर बेच दिया जाता है, जहाँ उन्हें यौन व्यापार के शिकार बनाया जाता है। NHRC ने इस जानकारी को स्वतः संज्ञान में लेते हुए कहा कि यदि इन दावों की सत्यता सिद्ध होती है, तो यह नाबालिग लड़कियों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। NHRC ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को दो सप्ताह के भीतर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। आयोग ने बताया कि नोटिस में संबंधित अधिकारियों से माँगी गई जानकारी में बिचौलियों के कार्य‑प्रणाली, फर्जी दस्तावेज़ों के प्रकार, बिक्री की कीमतें और पीड़ित लड़कियों की पहचान बदलने की प्रक्रिया शामिल होगी। इन राज्यों में नाबालिग लड़कियों की तस्करी की खबरें पहले भी सामने आई हैं, परन्तु इस बार राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार आयोग की सीधी भागीदारी ने मुद्दे को नई गंभीरता दी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में पीड़ितों को गोद ली हुई बेटियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे उनकी वास्तविक उम्र और पहचान छिपी रहती है। यदि आयोग की माँगी गई रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्य पुष्टि होते हैं, तो यह न केवल राज्य सरकारों और पुलिस बलों के लिए कड़ी जांच का कारण बन सकता है, बल्कि नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए नीतिगत सुधारों की आवश्यकता को भी उजागर करेगा। इस दिशा में आगे की कार्रवाई से संभावित रूप से तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद मिल सकती है।

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