उमर अब्दुल्लाह के इस्तीफ़े से जमे जम्मू‑कश्मीर में राजनीतिक संकट
प्रकाशित:
जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने अपने इस्तीफ़े को लेकर पार्टी के भीतर तीव्र असंतोष का सामना किया है। दो साल की सरकार पूरी करने के बाद उन्होंने पद त्याग दिया, परन्तु पार्टी के 17 विधायकों ने इस कदम के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया और खुलकर नाराज़गी जताई।
विधायकों की इस बेतहाशा असहमति से राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है, क्योंकि अब सरकार की कार्यवाही और भविष्य की दिशा को लेकर स्पष्टता नहीं है। इस संकट के कारण पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन और नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिससे आगामी राजनीतिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ने की संभावना है।
यह खबर क्यों अहम है
राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले फैसलों, चुनावी समीकरण और शासन की दिशा को समझने में मदद करता है।
इस खबर को शेयर करें
संबंधित खबरें
राहुल गांधी ने विदेशी संबंधों पर पीएम मोदी को खुली बहस की चुनौती दोहराई
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी संबंधों और 'देशद्रोही' के आरोपों को लेकर खुली बहस की चुनौती फिर से दोहराई। उन्होंने कहा कि विदेश नीति में पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा आवश्यक है, तथा मोदी सरकार को इन मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए। यह चुनौती पहले भी दी जा चुकी थी, जिससे दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव स्पष्ट हो रहा है।
नेहा बोरा के “ब्राह्मणवाद से आजादी” बयान पर सियासी घमासान, INDI गठबंधन में दरार
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने "ब्राह्मणवाद से आजादी" कहा, जिससे राजनीतिक माहौल में तीव्र उथल-पुथल मच गई। बीजेपी ने इस बयान को विपक्षी दलों पर निशाना बनाते हुए आलोचना की, जबकि कई विपक्षी नेताओं ने इसे सामाजिक समानता की मांग के रूप में समर्थन दिया। बयान के बाद INDI गठबंधन के भीतर मतभेद उभरे, कुछ गठबंधन सदस्य इस पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए गठबंधन की एकजुटता पर संदेह जताते दिखे। यह विवाद आगामी राजनीतिक समीक्षाओं में गठबंधन की स्थिरता को चुनौती दे सकता है।
राहुल गांधी ने मोदी को खुली बहस की चुनौती दी, मोहन भागवत को जज कहा
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस के लिए आमंत्रित किया, कहा कि वे किसी भी स्थान पर आ सकते हैं। उन्होंने मोहन भागवत को इस बहस का जज बनाने का प्रस्ताव रखा।
नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं तो फॉर्म‑6 भरें, दोबारा जुड़वाने का निर्देश
चुनाव आयोग ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (SIR) में नहीं दिखता, तो उसे फॉर्म‑6 भरकर अपना नाम दोबारा जोड़वाना होगा। इस प्रक्रिया में मतदाता को यह लिखना अनिवार्य है कि "मेरा नाम पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़ा जा रहा है"। फॉर्म‑6 के माध्यम से नाम पुनः जोड़ने के लिए कोई झूठा शपथ पत्र माना नहीं जाएगा और इस पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। आयोग ने यह भी कहा कि यह नियम सभी मतदाताओं पर लागू होगा, चाहे वे पिछले दस वर्षों से वोटर सूची में हों या नहीं। इस निर्णय से उन 13 करोड़ मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका नाम SIR के दौरान काट दिया गया था। अब वे बिना किसी केस के, फॉर्म‑6 के माध्यम से पुनः नामांकन कर सकते हैं, जिससे आगामी चुनावों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
