आर्मेनिया की संसद में सांसदों के बीच लात-घूंसे चले:महिलाओं पर विवादित बयान से भड़के नेता, कार्यवाही रोकनी पड़ी
मूल प्रकाशन:
सारांश
आर्मेनिया की संसद में गुरुवार को सत्तारूढ़ दल और विपक्षी सांसदों के बीच मारपीट हो गई। विवाद महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान से शुरू हुआ था। सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद तारोन चखोयान ने विपक्षी नेता नारेक कारापेटयन से माफी मांगने के लिए कहा था। उन्होंने कारापेटयन के परिवार को लेकर भी बयान दिया था। इससे नाराज विपक्षी सांसद स्पीकर के पोडियम की ओर बढ़े। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई।
यह शीर्षक और सारांश दैनिक भास्कर के RSS फ़ीड से लिया गया है। दैनिक आयाम ने इसमें कोई तथ्य नहीं जोड़ा है।
मुख्य बिंदु
- आर्मेनिया की संसद में गुरुवार को सत्तारूढ़ दल और विपक्षी सांसदों के बीच मारपीट हो गई।
- विवाद महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान से शुरू हुआ था।
- सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद तारोन चखोयान ने विपक्षी नेता नारेक कारापेटयन से माफी मांगने के लिए कहा था।
यह खबर क्यों अहम है
अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भारत की विदेश नीति, व्यापार और प्रवासी भारतीयों को प्रभावित कर सकती हैं।
इस खबर को शेयर करें
संबंधित खबरें
इसराइल में बिन्यामिन नेतन्याहू के ख़िलाफ़ अरब पार्टियों को इतनी सीटें क्यों मिलीं?- द लेंस
इसराइल में बंटे हुए इस जनादेश का क्षेत्रीय और वैश्विक मोर्चों पर कैसा असर पड़ेगा. ऐसे ही कुछ सवालों पर इस बार द लेंस में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ जर्नलिज़्म मुकेश शर्मा ने चर्चा की है.
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सेना को दी खुली छूट, बोले-हमला हुआ तो खत्म करने की शर्तें खुद तय करें
कमांडर-इन-चीफ ने सैन्य खुफिया ढांचे को मजबूत करने, "सिद्धांत" (डॉक्ट्रिन) और "रणनीति" (टैक्टिक्स) के क्षेत्रों में स्वदेशी रक्षा प्रणाली को और गहरा करने, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से अत्याधुनिक रक्षा और सुरक्षा क्षमताएं विकसित करने, तथा आध्यात्मिक शक्ति और जिहाद की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया.
अमेरिका को G20 की 'फैमिली फोटो' रद्द करनी पड़ी, एक साथ चल रहे दो विवाद
बैठक में शामिल लोगों का कहना है कि इन असहमतियों के कारण शनिवार को बैठक खत्म होने पर विदेश मंत्रियों की ओर से कोई संयुक्त बयान जारी होने की संभावना नहीं है.
अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की पार्टी के प्रदर्शन का भारत पर क्या असर होगा
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता का ही इम्तिहान नहीं, बल्कि संसद में उनके नियंत्रण की परीक्षा भी है. अगर इन चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदन में बहुमत गंवा देती है, तो उनके लिए फ़ैसले पास कराना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा.